ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
रियल एस्टेट रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (रेरा) कानून लागू होने से प्रॉपर्टी कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो गया है। कारोबारियों के सामने भूखों मरने की स्थिति हो गई है। ऐसे में प्रदेश सरकार कानून में संशोधन कर कारोबारियों को पंजीकरण शुल्क में रियायत देकर राहत दे।
दून रियल एस्टेट एसोसिएशन अध्यक्ष रणवीर सिंह चौधरी ने ये बातें बृहस्पतिवार के पत्रकारों से बातचीत में कहीं। एसोसिएशन अध्यक्ष चौधरी ने कहा कि सरकार ‘रेरा’ लागू होने से जो समस्याएं हुई हैं उनका अध्ययन करे और संशोधन करे। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को कई अधिकार दिए हैं। इसके तहत प्रदेश सरकार मूल कानून में छेड़छाड़ किए बगैर संशोधन कर सकती है। ऐसे में उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से उप नियम जोड़े और घटाए सकते हैं। एसोसिएशन के सचिव केवल सिंह पुंडीर ने कहा कि ‘रेरा’ लागू होने के बाद प्रॉपर्टी कारोबार ठप है। देहरादून में आर-थ्री भूमि 1996 के मास्टर प्लान के हिसाब से है। जबकि जिन गांवों में खेती होती थी आज वहां कॉलोनियां बन गई हैं। प्राधिकरण आर-थ्री का सीमांकन बढ़ाए, ताकि सरकार को इससे राजस्व मिल सके। एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष बिजेंद्र सिंह रावत ने कहा कि जिन कारोबारियों के प्रोजेक्ट ‘रेरा’ लागू होने से पहले से चल रहे हैं उन्हें एक साल की छूट दी जाए। पदाधिकारियों ने बताया कि ‘रेरा’ मामले में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक को ज्ञापन के जरिये सुझाव भी दिए गए हैं।