एक फरवरी से ई-वे बिल से दूसरे राज्य में जाएगा माल
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। देश भर में एक फरवरी से ई-वे बिल सिस्टम लागू होगा। इसके लिए जीएसटी परिषद ने 15 जनवरी से ई-वे बिल सिस्टम का ट्रायल शुरू करने के आदेश दिए हैं। शुक्रवार को जीएसटी परिषद ने वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से सभी राज्यों से ई-वे बिल को लेकर जानकारी ली। सचिवालय में वित्त मंत्री प्रकाश पंत व विभागीय अधिकारियों ने राज्य में ई-वे बिल की तैयारियों के बारे में अवगत कराया।
वीडियो कांफ्रेसिंग में जीएसटी परिषद ने एक फरवरी से ई-वे बिल को पूरी तरह से लागू किया जाएगा। राज्य से बाहर जाने और आने वाला सामान ई-वे बिल सिस्टम के माध्यम से आएगा। इंटर स्टेट सामान पर ई-वे बिल अनिवार्य होगा। राज्य के भीतर माल को एक स्थान से दूसरे स्थान भेजने के लिए फिलहाल ई-वे बिल में मोहलत दी गई। इंटर स्टेट सामान पर पूरी तरह से ई-वे बिल लागू होने के बाद ही राज्य के भीतर एक स्थान से दूसरे स्थान जाने वाले समान पर ई-वे बिल लागू किया जाएगा। वित्त प्रकाश पंत ने व्यापारियों की समस्याओं को भी जीएसटी काउंसिल के समक्ष रखा। जिसमें व्यापारियों को मैनुअल ही टैक्स रिफंड करने पर भी चर्चा की गई। उन्होंने जीएसटी काउंसिल को अवगत कराया कि उत्तराखंड राज्य में 15 दिसंबर से ई-वे बिल का ट्रायल शुरू कर दिया गया।
क्या है ई-वे बिल
जीएसटी प्रणाली में ई-वे बिल से ही व्यापारी बाहर से माल मंगवा सकते हैं और भेज सकते हैं। इसके लिए व्यापारियों को ऑनलाइन ई-वे बिल जनरेट करना होगा। ई-वे बिल में माल भेजने और प्राप्त करने वाले व्यापारी का जीएसटीएन नंबर देना होगा। इसके साथ ही सामान का ब्योरा, वाहन का नंबर भी अंकित करना होगा। व्यापारी एसएमएस के माध्यम से भी ई-वे बिल जनरेट कर सकते हैं। ई-वे बिल जनरेट होने के बाद व्यापारी इसे निरस्त करना चाहता है तो इसके लिए 24 घंटे का ही समय होगा। माल ले जाने वाला वाहन रास्ते में खराब हो जाता है तो जिस वाहन से माल भेजा जाएगा। उसका नंबर भी अपलोड करना होगा।