अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
मानसून की पहली बारिश ने ही शहर को ताल तलैया बना दिया। जलभराव के कारण जगह-जगह वाहनों के पहिए थम गए। ज्वालापुर से लेकर उत्तरी हरिद्वार तक जलभराव होने से शहर का हाल बेहाल रहा। भगत सिंह चौक पर पानी भरने से रूट डायवर्ट करना पड़ा। वाहनों को टिबड़ी फाटक से निकाला गया। ट्रेनों के आवागमन पर बार-बार फाटक बंद होने पर लंबा जाम लग गया।
लंबे इंतजार के बाद बुधवार की सुबह को बारिश शुरू हुई। बारिश रुक-रुककर दोपहर दो बजे तक चलती रही। हालांकि हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में रुड़की के मुताबिक बारिश कम ही हुई। आपदा प्रबंधन विभाग के के अनुसार हरिद्वार में 40 एमएम पानी बरसा। पहली ही बारिश ने नगर निगम की साफ-सफाई की पोल खुल दी। बारिश का पानी नालियों के बजाय सड़कों पर बहता रहा। ज्वालापुर के सर्राफा बाजार, कटहरा बाजार, मोहल्ला कोटरावान आदि में सड़कों पर पानी के साथ कीचड़ जमा हो गया। कनखल में झंडा चौक बाजार, ब्रह्मपुरी में रेलवे क्रासिंग के नीचे ललतारौ पुल और ब्लडबैंक के सामने से मेला अस्पताल तक कीचड़ जमा होने से निकलना भी मुश्किल हो गया।
जाम खुलवाने के लिए देर से पहुंची पुलिस
टिबड़ी फाटक के दोनों तरह लंबा जाम लग गया। शहर के अंदर की मुख्य सड़क से भी निकलना मुश्किल हो गया। जाम से खुलवाने के लिए पुलिस नजर नहीं आई। जाम बेकाबू होने के बाद कुछ पुलिस कर्मी सड़क पर उतरे। करीब घंटे भर में यातायात सुचारु किया जा सका।
शहर में भारी मात्रा में पॉलिथीन और थर्माकोल का उपयोग हो रहा है। जिसे उपयोग कर नालियों में डाला जा रहा है। जब तक पॉलिथीन और थर्माकोल का उपयोग बंद नहीं होगा, तब तक नालों की साफ सफाई होने से भी काम नहीं चलेगा। मैने स्वयं निरीक्षण कर जलभराव और गंदगी संबंधी समस्या देखी। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए समीक्षा बैठक की है।
- मनोज गर्ग, मेयर।
बारिश से किसानों के चेहरे खिले
बारिश से किसानों के चेहरे खिल गए। हालांकि क्षेत्र में कम बारिश हुई, लेकिन इससे फसलों के लिए बारिश अमृत बनकर बरसी। बारिश से ईख, ज्वार, आम, लौकी, टमाटर, गोभी आदि की फसलों पर जमी डस्ट साफ हो गई। अब किसान अन्य फसलों की सिंचाई रोककर धान की रोपाई शुरू कर सकेंगे।