देवप्रयाग (ब्यूरो)। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रशासन ने बृहस्पतिवार रात ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित मां पाषाणी देवी मंदिर को ध्वस्त कर दिया है। बिना पूर्व सूचना के मंदिर को रातों रात ध्वस्त करने से लोग भड़क गए हैं। लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन सूचना दे देता तो प्रतिमा, दानपात्र और घंटे को समीप स्थित नागराजा मंदिर में रख देते। वहीं प्रशासन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अवैध रूप से निर्मित मंदिरों को हटाया जा रहा है।
बस अड्डे से महज डेढ़ सौ मीटर दूर स्थित मंदिर को तोड़ने की सूचना सुबह मिलते ही यहां लोगों में रोष फैल गया। इस मंदिर का निर्माण 1987 में बार-बार हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए किया गया था। स्थानीय निवासी विनोद टोडरिया का कहना है जिस प्रकार बछेलीखाल मंदिर को हटाने के लिए तीन दिन का वक्त दिया गया है, उसी प्रकार नगर में स्थित पाषाणी देवी मंदिर को समय दिया जाता, तो मंदिर शिफ्ट किया जा सकता था। सामाजिक नेता कृष्णकांत कोटियाल ने तहसीलदार से मंदिर की मूर्ति और घंटियों को जनता के सुपुर्द करने की मांग की। नगर पंचायत अध्यक्ष शुभांगी कोटियाल, सभासद विद्यार्थी पालीवाल व विकास ध्यानी, व्यापार सभा अध्यक्ष मैचंद रावत, बीडीसी सदस्य रजनी टोडरिया और माधव ने कहा कि बिना सूचना दिए की गई कार्रवाई जनता की आस्था पर चोट है। यह सहन नहीं किया जाएगा।
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तहसील के अंतर्गत 7 मंदिरों को चिह्न्ति किया गया है, जो अवैध निर्मित हैं। इनको हटाने की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर की जा रही है। मंदिर का निर्माण निजी भूमि में नहीं किया गया था, इसलिए सूचना नहीं दी गई। -शंकर लाल चौरासिया, तहसीलदार देवप्रयाग