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कांवड़ मेले को 20 दिन, तैयारियां सिफर

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अमर उजाला ब्यूरो
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हरिद्वार।
कांवड़ मेला शुरू होने में अब 20 दिन बचे हैं। धरातल पर कहीं भी तैयारियां नजर नहीं आ रही है। अधिकारी निरीक्षण और बैठकों में निर्देश देने तक सीमित हैं। कांवड़ पटरी खस्ताहाल है। बरसात शुरू होने के बाद कांवड़ पटरी की मरम्मत करना मुश्किल होगा।
श्रावण मास कांवड़ मेले की शुरूआत इस बार नौ जुलाई को होगी। मेले के दौरान यूपी, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान जैसे राज्यों से दो करोड़ से अधिक श्रद्धालु गंगा जल लेने हरिद्वार आते हैं। शिवभक्तों की इतनी संख्या को देखते हुए व्यापक तैयारियां जरूरी हैं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सीसीआर में अधिकारियों के साथ कांवड़ मेले की तैयारियों के संबंध में बैठक की थी। इसके बाद अधिकारियों ने भी कई बार स्थलीय निरीक्षण किए। अब कांवड़ मेला शुरू होने में सिर्फ 20 दिन का समय बचा है। प्रशासन की तमाम तैयारियां सिर्फ कागजों तक ही सिमटी हुई है। मायापुर से लेकर नारसन बॉर्डर तक पूरी कांवड़ पटरी अव्यवस्थाओं से भरी पड़ी है। हरिद्वार शहर में ही डामकोठी से लेकर जटवाड़ा पुल तक कांवड़ पटरी मार्ग जगह-जगह से क्षतिग्रस्त है। किनारों पर लगाई गई सीमेंट की टाइल्स जमीन में धंस चुकी है।
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सिंहद्वार के पास गंगा किनारे की दीवार टूटी है। इन सारी अव्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में काफी समय लग सकता है, जबकि तैयारियों के लिए समय कम बचा है। इसके बाद भी तैयारियों की सुस्त चाल के कारण कांवड़ मेले की व्यवस्थाएं पटरी से उतर सकती हैं। बरसात शुरू होने पर मरम्मत जैसे कार्य नहीं हो पाएंगे। यदि होंगे भी तो लीपापोती की जाएगी और अधिकारियों की इस लापरवाही का खामियाजा करोड़ों शिवभक्तों को झेलना पड़ेगा।


पटरी मार्ग पर हैंडपंप खराब
हाईवे पर यातायात व्यवस्था सुचारु रखने के लिए प्रशासन का पूरा जोर रहता है कि पैदल कांवड़ यात्रियों को नहर पटरी मार्ग से निकाला जाए। कांवड़ पटरी मार्ग पर कई जगहों पर हैंडपंप लगे हैं, लेकिन यह खराब पड़े हैं। हालांकि मेले के दौरान अस्थायी रूप से पानी के टैंक रखे जाते हैं। पुराने हैंडपंपों की मरम्मत करा दी जाए तो आम दिनों में स्थानीय लोगों को भी इसका लाभ मिल सकता है।


गंगनहर की सुरक्षा दीवार बनना जरूरी
कांवड़ पटरी मार्ग पर गंगनहर की तरफ दीवार बनाई गई है। यह दीवार बीच बीच में कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गई है। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के सामने की तरफ दीवार का एक बड़ा हिस्सा ढह गया है। आम दिनों में कांवड़ पटरी पर वॉक के लिए जाने वाले राहगीरों के लिए खतरा बना हुआ है। कांवड़ मेले के दौरान पटरी पर आवाजाही बढ़ने से यह खतरा और बढ़ जाता है।
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बेतरतीब पोल और लटकते तार बने खतरा
कांवड़ पटरी मार्ग पर कई जगह बिजली के पोल बेतरतीब लगे हैं। जबकि एलटी और एचटी लाइन के तार भी लटक रहे हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु छह फिट से ऊंची कांवड़ ले जाते हैं। ऊंचाई ज्यादा होने से कांवड़ के पोल या तार में टकराने का खतरा बना रहता है। समय रहते कांवड़ पटरी से बिजली के पोल और तार दुरुस्त होने भी आवश्यकता है। वहीं ऊर्जा निगम अधिकारी कांवड़ पटरी पर पथ प्रकाश व्यवस्था और वायर दुरुस्त करने के लिए टेंडर आमंत्रित करने का दावा कर रहे हैं।
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