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सीएम ने नहीं दिया एक भी पत्र का जवाब

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अमर उजाला ब्यूरो
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हरिद्वार।
मातृसदन की ओर से गंगा में खनन को लेकर हुई 10 शिकायतों की जांच शासन ने उन्हीं अधिकारियों को सौंप दी है, जिन पर अवैध खनन कराने के आरोप लगाए गए हैं। इस पर मातृसदन ने हैरानी जताई है। साथ ही खनन को लेकर पारदर्शी नीति बनाने के मुख्यमंत्री के बयान पर भी सवाल उठाए हैं। स्वामी शिवानंद ने पूछा है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आज तक उनके एक भी पत्र का जवाब नहीं दिया है। क्या यही मुख्यमंत्री की पारदर्शिता है।

मातृसदन में पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी शिवानंद ने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की तरह रोजाना हरिद्वार आएं तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन रोजाना आकर पुलिस प्रशासन को मुट्ठी में लेकर बैठ जाने का क्या औचित्य है। तमाम जनता और श्रद्धालुओं को रोज रोज के दौरों से परेशानी उठानी पड़ती है। उन्होंने सीएम के हरिद्वार में खनन को लेकर पारदर्शी नीति के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को गंगा में खनन को लेकर तमाम पत्र भेजे गए। कई पत्रों की रिसीविंग भी उनके पास मौजूद है। सीएम ने आज तक किसी भी पत्र का जवाब नहीं दिया है। तो क्या यही मुख्यमंत्री की पारदर्शिता है।
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अपर सचिव विनोद कुमार सुमन का पत्र दिखाते हुए स्वामी शिवानंद ने कहा कि शासन को 28 अप्रैल से नौ मई तक 10 अलग-अलग शिकायती पत्रों पर जांच बैठाई गई है। पहले तो सभी पत्रों पर एक ही दिन संज्ञान लेने पर सवाल उठाते हुए स्वामी शिवानंद ने कहा कि गंगा में अवैध खनन का आरोप जिन खनिज कर्म निदेशक और डीएम हरिद्वार पर है, उन्हीं दोनों अधिकारियों को शिकायतों की जांच सौंपी गई है। क्या ये अधिकारी खुद के खिलाफ जांच करेंगे।
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उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की सारी पारदर्शिता शराब व खनन माफिया के लिए है।

गाउन न पहनकर सीएम ने तोड़ा नियम
देहरादून के एक विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के गाऊन न पहनने पर भी मातृसदन ने सीएम पर हमला बोला। सीएम ने गाउन पश्चिमी सभ्यता की गुलामी का प्रतीक बताया था। स्वामी शिवानंद ने कहा कि यदि ऐसा था तो सीएम नियम बदलकर उस कार्यक्रम में जाते। समारोह में गाउन न पहनकर सीएम ने खुद नियम का उल्लंघन किया है। भारतीयता में तो चोटी भी रखी जाती है, तो सीएम बताएं उनके संगठन या सरकार में कितने लोगों ने इसे अपनाया है। पैंट शर्ट का त्याग कितने लोगों ने किया है।
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