पंजाब नेशनल बैंक के साथ 56.20 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में दोषी मुकेश कुमार को अदालत ने तीन साल कठोर कैद और 10 हजार रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई है।
इस फैसले के साथ प्रथम अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संजीव कुमार ने टिप्पणी की है कि वर्तमान समय में जब धोखाधड़ी और षड्यंत्र की वारदात बढ़ती जा रही है, तो सामान्य व्यक्तियों का कानून के शासन में विश्वास बनाए रखना के लिए कठोर सजा न्यायोचित है।
यह मामला दिसंबर 2009 का है। प्राथमिकी शहर कोतवाली में बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक की ओर से साल 2010 में दर्ज करवाई गई थी। मेरठ निवासी अभियुक्त मुकेश ने पलटन बाजार शाखा में फर्जी दस्तावेज के आधार पर खाते खोले थे।
उसने दिल्ली और गाजियाबाद की विभिन्न बैंक शाखाओं के खाताधारकों के नाम पर फर्जी चेक तैयार किए और उन्हें अपने खातों में जमा कर 56 लाख रुपये से ज्यादा की रकम निकाल ली थी। धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ, जब संबंधित बैंक शाखाओं ने मुकेश के खाते वाली शाखा को सूचित किया कि जो चेक उन्होंने भुगतान किए, उनके मूल चेक अभी भी खाताधारकों के पास हैं। प्राथमिकी 23 जनवरी 2010 को शहर कोतवाली में दर्ज कराई गई थी।