ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
साहिया। लेबरा और उदावा गांव के ग्रामीणों ने सरकारी सिस्टम को आईना दिखाने का काम किया है। ग्रामीणों की कई बार की मांग के बाद भी जब विभागीय अधिकारियों ने वर्षों से क्षतिग्रस्त पड़ी लेबरा-उदावा पेयजल लाइन की कोई सुध नहीं ली तो ग्रामीणों ने खुद के खर्चे पर लाइन मरम्मत की ठानी। बीते चार दिन से ग्रामीण श्रमदान कर लाइन मरम्मत के काम में जुटे हुए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि लाइन की मरम्मत के लिए अब तक वह अपनी जेब से 40 हजार रुपये खर्च कर चुके हैं। पांच दशक पूर्व जल संस्थान ने अस्मता खड्ड से गांव तक 22 किमी लंबी पेयजल लाइन बिछाई थी, जिसके बाद विभागीय अधिकारियों ने लाइन की ओर मुड़ कर नहीं देखा। अब लाइन जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई है। गांव तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। अक्सर लो प्रेशर की समस्या बनी रहती है। ग्रामीण भोटिया, गुलाबू, पुसू, नैनु, कृपाल, गुडडू का कहना है कि सरकारी सिस्टम से परेशान होकर ग्रामीणों को श्रमदान का निर्णय लेना पड़ा। गांव में 80 से अधिक परिवार निवास करते है। अब तक गांव में पानी नहीं आने के कारण ग्रामीणों को तीन-चार किमी की पैदल दूरी नापनी पड़ रही है। उस पर भी लोगों को पीने लायक पानी नसीब नहीं हो रहा है।
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बयान
विभाग के पास बजट का अभाव है। लाइन की मरम्मत के लिए प्रस्ताव शासन स्तर पर भेजा जा चुका है। स्वीकृति मिलते ही लाइन की मरम्मत करा दी जाएगी।
- बलबीर सिंह सजवाण, अवर अभियंता, जल संस्थान