10 लाख जुर्माना भर दिया, पर थैला नहीं लिया
सुनीत द्विवेदी
देहरादून। राजधानी में 40 से 50 माइक्रोन से कम मोटाई वाले पॉलिथीन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध के बावजूद इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। आलम यह है कि निगम की ओर से जनवरी से मार्च तक चले अभियान में दुकानदारों और अन्य लोगों ने 10 लाख ने अधिक जुर्माना तो भर दिया, लेकिन कपड़े का थैला नहीं लिया। आलम यह है कि आज भी बाजारों में पॉलिथीन खुलेआम प्रयोग में लाई जा रही है।
पलटन बाजार, हनुमान चौक, मोती बाजार समेत सभी बाजारों और क्षेत्रीय दुकानदारों द्वारा पॉलिथीन का इस्तेमाल हो रहा है। कई लोग पॉलिथीन में घर का कचरा भरकर सड़कों पर फेंक रहे हैं, जिसे खाकर पशु बीमार पड़ रहे हैं। इधर-उधर फेंकी गई पॉलिथीन कचरे का रूप लेती है। नालियां जाम हो जाती हैं। नगर निगम प्रशासन का दावा है कि प्रतिबंधित प्लास्टिक की बिक्री बंद है। पर सवाल उठता है कि पॉलिथीन बंद है तो नाला सफाई अभियान में प्रतिबंधित पॉलिथीन कैसे मिल रही है?
नगर निगम की ओर से जनवरी से मार्च तक चले अभियान में निरीक्षकों ने 2002 लोगों का चालान किया था। साथ ही 6,69,650 रुपये जुर्माना वसूला। वहीं, सुपरवाइजरों ने भी इसी अवधि में अभियान चलाते हुए 1886 चालान और 3,32,600 रुपये जुर्माना वसूला। इसके बाद भी दुकानदार व व्यापारी प्रतिबंधित पॉलिथिन का प्रयोग कर रहे हैं।
---
कचरे में पॉलिथीन की मात्रा 60 प्रतिशत
नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक निगम क्षेत्र से रोजाना 350 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। जिसमें से 60 प्रतिशत पॉलिथीन होती है। जबकि शेष कागज, कपड़ा व अन्य सामान होता है। ऐसे में पॉलिथीन बैग का निस्तारण गंभीर चुनौती बन चुकी है। यह किसी भी हालत में नष्ट नहीं होती है।
----
प्लास्टिक से होती हैं तमाम बीमारियां
पॉलिथीन नष्ट नहीं होने के कारण कई जगहों पर लोग इसमें आग लगा देते हैं। इससे निकलने वाला धुआं वातावरण को प्रदूषित करता है। अस्थमा के मरीजों को भी परेशानी होती है। पाॅिलथीन के धुआं से सांस लेने में तकलीफ व एलर्जी भी फैलती है। यह दोनों बीमारियां जानलेवा साबित हो सकती हैं। वहीं, प्लास्टिक या पॉलिथीन में रखा गया खाना खाने से इम्यूनो सिस्टम कमजोर होता है। इससे किडनी खराब होने के साथ ही कैंसर का भी खतरा रहता है। बहुत सी पॉलिथीन या प्लास्टिक में लेड और मरकरी होता है, जो मनुष्य के साथ ही जानवरों के लिए भी बहुत घातक होता है।
---
नगर निगम भी नहीं लगा पा रहा लगाम
पॉलिथीन की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने की जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की है। निगम के पास जब्त की गई 12 क्विंटल से अधिक पॉलिथीन जमा है। जिसके टुकड़े कर उन्हें निगम के गोदाम में रखा गया है। इस पॉलिथीन का क्या करना है, यह अभी तय नहीं हो पाया है।
---
मवेशियों के लिए खतरनाक
पॉलिथीन मवेशियों के लिए भी बहुत खतरनाक है। आवारा पशु चारे की तलाश कचरे के ढेर पर पहुंचते हैं। जहां खाद्य सामग्री के साथ पॉलिथीन का सेवन भी कर लेते हैं। वह पॉलिथीन धीरे-धीरे मवेशियों के पेट में एकत्र हो जाती है और पेट फूलने के साथ ही जानवर की मौत हो जाती है।
---
स्वच्छता अभियान को लगा रही पलीता
पॉलिथीन स्वच्छता अभियान को भी पलीता लगा रही है। मौजूदा समय में पॉलिथीन का कचरा शहर में सबसे ज्यादा निकल रहा है। जिस कारण नालियां भी जाम हो रही हैं। ऐसे में बरसात में नाली चोक होने के कारण गंदा पानी सड़कों पर बहता है।
---
सजा का ये प्रावधान
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) तथा प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट-2016 में किए गए प्रावधान के मुताबिक प्रतिबंधित पॉलिथीन बेचने और इसका इस्तेमाल करने वाले पर 500 से 50000 रुपये तक के जुर्माना का प्रावधान है। इसके अलावा जुर्माने के साथ ही छह महीने की सजा भी सुनाई जा सकती है।
---
कोट ::::
नगर निगम की ओर से पॉलिथीन के खिलाफ अभियान चलाया जाता है। जनवरी से मार्च तक लगातार अभियान चलाया गया। अब भी बीच-बीच में टीम जाकर कार्रवाई कर रही है। जब तक बाहर से आने वाली पॉलिथीन पर प्रतिबंध नहीं लगेगा, ये समस्या बरकरार रहेगी।
- नीरज जोशी, अपर नगर आयुक्त, नगर निगम