ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
उत्तराखंड जल विद्युत निगम में अवर अभियंताओं के पदों पर हुई नियुक्तियों में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि निदेशक और शासन की स्वीकृति के बगैर ही अवर अभियंताओं के कुछ पदों पर नियुक्तियां की गईं। निगम के सहायक अभियंताओं ने तीन जून को प्रबंध निदेशक एसएन वर्मा से मामले की लिखित शिकायत की। इसके बावजूद प्रकरण की जांच किए बगैर तीन सहायक अभियंताओं को अधिशासी अभियंताओं के पदों पर पदोन्नति दे दी गई।
जल विद्युत निगम के कुछ सहायक अभियंताओं ने निगम में सहायक अभियंता से अधिशासी अभियंता एवं अवर अभियंताओं के कुछ पदों पर हुई नियुक्तियों पर नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है। आरोप है कि हाल ही में सहायक अभियंता से अधिशासी अभियंता के पदों पर जिन तीन अभ्यर्थियों को पदोन्नति दी गई उनकी नियुक्ति ही नियम विरुद्ध हुई है। शिकायती पत्र में कहा गया है कि 28 मार्च 2018 को सहायक अभियंताओं की अंतिम ज्येष्ठता सूची जारी गई, उसमें दो सहायक अभियंता ऐसे हैं जिन्हें संविदा से नियमित किया गया। जबकि, निगम में ऐसी कोई नियमावली नहीं हैं जिसमें संविदा से कार्मिक को नियमित किया जा सके।
इसके अलावा निगम में पांच ऐसे अवर अभियंता सिविल की नियुक्तियां हुई हैं, जिनमें अभ्यर्थियों के उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन की परीक्षा में फेेल होने के बावजूद्र यूजेवीएनएल में नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियां दे दी गईं। निगम के सहायक अभियंताओं ने शिकायती पत्र में सूचना के अधिकार अधिनियम से मांगी गई जानकारी का भी हवाला दिया है।
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निगम में प्रमोशन और नियुक्तियों में फर्जीवाड़े की शिकायत के संबंध में विभाग के सहायक अभियंताओं की ओर से मुझे अब तक कोई शिकायती पत्र नहीं मिला है। यदि ऐसा कोई मामला है तो शिकायत मिलने पर निश्चित रूप से प्रकरण की जांच कराई जाएगी। -एसएन वर्मा, प्रबंध निदेशक, उत्तराखंड जल विद्युत निगम