ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
बादल फटने और प्राकृतिक आपदाओं पर नजर रखने के लिए हिमालयी राज्यों में 10 अत्याधुनिक सेंसर लगाए जाएंगे। पहला सेंसर जम्मू कश्मीर में अमरनाथ यात्रा मार्ग पर बनिहाल में जुुलाई तक स्थापित कर दिया जाएगा। बाकी सभी नौ सेंसर अगले साल सभी हिमालयी राज्यों में लगाए जाएंगे।
यह जानकारी पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. राजीवन ने शनिवार को वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन जियोलाजी के 51वें स्थापना दिवस समारोह में दी। डॉ. राजीवन ने कहा कि दुनिया में जलवायु परिवर्तन की रफ्तार को देखते हुए आने वाले समय में भारी संकट खड़ा होना तय है। ऐसे में पर्यावरण में हो रहे बदलावों के कारणों को गंभीरता से समझने के साथ ही दुष्प्रभावोें को रोकने को लेकर गंभीर कदम उठाने होंगे। डॉ. एम राजीवन ने बताया कि साल दर साल गर्म हवाओं का रुख बढ़ रहा है। इसके लिए गुजरात, ओडिशा व गुजरात जैसे राज्याें ने अध्ययन करने को लेकर मंत्रालय के विश्ेाषज्ञों की मदद मांगी है। दिल्ली जैसे महानगर के लोगों को शुद्ध हवा मिले, इसकी मानीटरिंग के लिए महानगरों में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाया जा रहा है। मंत्रालय की ओर से नेशनल फैसिलिटी फार एयरबोर्न रिसर्च पर भी काम किया जा रहा है। आकाशीय बिजली से होने वाली तबाही की मानीटरिंग को लेकर देश में 27 मानीटरिंग सेंसर लगाए जा रहे हैं।
वाडिया संस्थान के निदेशक डॉ. कलाचंद सांई ने उत्तराखंड समेत देश के तमाम राज्यों में प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े तमाम शोध पर संस्थान के वैज्ञानिकों के योगदान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि चौराबाड़ी झील को लेकर कोई खतरा नहीं है। समारोह में संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. वीसी ठाकुर, डॉ. राजेश शर्मा, डॉ. हरिपाल, डॉ. प्रकाश चौहान, डॉ. एसएस भाकुनी, डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव, डॉ. पीएस नेगी, डॉ. एसके राय समेत संस्थान के तमाम वैज्ञानिक, शोधार्थी उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय शोध के लिए वैज्ञानिक सम्मानित
समारोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय शोध करने वाले उत्कृष्ट वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया। समारोह में इंस्टीट्यूट ऑफ सीसमोलाजिकल रिसर्च के वैज्ञानिक डॉ. सिद्धार्थ प्रिजोमवाला व एनजीआरई के वैज्ञानिक डॉ. प्रियदर्शी चिन्मय कुमार को प्रो. आरसी मिश्रा गोल्ड मेडल फार जियोसाइंस- 2019 का पुरस्कार दिया गया। इसके साथ ही ‘बेस्ट रिसर्च पेपर आफ वाडिया इंस्टीट्यूट-2018 का पुरस्कार पर्वज्योति फुकान, कौशिक सेन, एचबी श्रीवास्तव, सौरभ सिंघल अरण्य सेन को उनके उल्लेखनीय वैज्ञानिक शोध के लिए दिया गया।
‘वर्ष 2050 तक खत्म हो जाएंगे हिमखंड’
-समुद्र का तापमान बढ़ने से खतरनाक हो रहे चक्रवात
देहरादून। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम राजीवन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों का असर इंसानों, वनस्पतियों के साथ समुद्र पर भी दिखायी दे रहा है। साल दर साल पूरी दुनिया मेें समुद्र का तापमान बढ़ रहा है। इसकी वजह से पूरी दुनिया में चक्रवात और खतरनाक साबित हो रहे हैं।
‘ट्रापिकल साइक्लोन’ के दुष्परिणामों से पूरी दुनिया रूबरू हो रही हैं। भयावह चक्रवातों से पूरी दुनिया में भारी तबाही हो रही है। समुद्र के बढ़ते तापमान पर नजर रखने के लिए समुद्र के नीचे एक हजार मीटर की गहरायी पर ऐसे उपकरण लगाए जा रहे हैं जो समुद्र के तापमान पर नजर रखेेंगे। भारत उन चुनिंदा देशों में से एक है जो इस अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। जलवायु परिवर्तन के चलते दुनिया में बढ़ते तापमान के कारण 2050 तक दुनिया से हिमखंड समाप्त हो सकते हैं। इसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे। इसके अलावा साल दर साल गर्म हवाओं के बढ़ते प्रभाव से देश दुनिया में हर साल सूखे का क्षेत्रफल बढ़ रहा है।
मुंबई, चेन्नई में लगेंगे ‘फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम’
देहरादून। डॉ. एम राजीवन ने बताया कि मुंबई व तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में बारिश व बाढ़ से हर साल होने वाली तबाही व शहरियाें को बाढ़ से आगाह करने के लिए ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ लगाया जाएगा। पहले चरण में ‘फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम’ चेन्नई में लगेगा। ‘फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम’ से शहरियाेें को मोबाइल फोन के जरिए उन इलाकों की जानकारी तत्काल मिलेगी, जहां बारिश के बाद भयंकर जलभराव होगा। चेन्नई व मुंबई मेें बारिश के दौरान जबरदस्त जलभराव से शहरियों को हर साल बड़ी परेशानी से जूझना पड़ता है।