ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
साहिया। क्षेत्र में थुनेर के पेड़ धरती को हरा भरा करने के साथ ही विभिन्न बीमारियों के इलाज में भी सहायक होंगे। एक समय ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में बहुतायत में पाए जाने वाले औषधीय वृक्ष थुनेर (वनस्पतिक नाम टैक्सैस बकाटा) को विलुप्त होते देख चकराता वन प्रभाग ने अनूठी पहल की है। वन विभाग ने बर्फीले इलाके देववन में स्थित ग्रीन हाउस में कलम विधि से थुनेर की नर्सरी तैयार की है। इसके अलावा जंगल में पांच हेक्टेयर क्षेत्र में 10 हजार पौधे रोपे हैं।
सात हजार फीट की ऊंचाई से ऊपर उगने वाले थुनेर वृक्ष से कैंसर समेत खांसी, बुखार, दमा और पेट दर्द आदि के इलाज के लिए औषधि तैयार की जाती है। एक समय था जब आरक्षित वन क्षेत्र चकराता के खडंबा, मुंडाली, देववन और बुधेर के जंगलों में थुनेर प्रचुर मात्रा में मिलता था। पिछले तीन-चार दशक से भारी दोहन के चलते थुनेर वृक्ष की संख्या धीरे-धीरे समाप्त होने लगी और थुनेर विलुप्तप्राय हो गया। इसकी महत्ता को देखते हुए चकराता वन प्रभाग ने देववन नर्सरी में कलम विधि से हजारों पौधे तैयार किए हैं। इसमें से 10 हजार पौधे वन क्षेत्र में रोपे गए हैं।
डीएफओ चकराता दीप चंद आर्य ने कलम विधि के बारे में बताते हुए कहा कि थुनेर प्रजाति के सात पेड़ खडंबा वन क्षेत्र में बचे थे, जिनसे कलम काटकर मिक्स चैंबर में विशेष तापमान में रखा गया। जड़ फूटने के साथ ही कलम को पांच माह के लिए ग्रीन हाऊस में रखा। कलम में पत्तियां निकलने पर पौध को ग्रीन हाऊस से निकालकर खुले वातावरण में करीब छह माह तक रखने के बाद जंगल में रोपा गया है। पौध तैयार करने में सभी वनकर्मियों का सहयोग रहा।
उन्होंने बताया कि विलुप्त थुनेर को बचाने का यह प्रयास अगर सफल हुआ तो थुनेर को वन प्रभाग के अन्य वन क्षेत्रों में भी रोपा जाएगा।