ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। प्रदेश में एमबीबीएस दाखिलों की काउंसिलिंग पर भारी असमंजस पैदा हो गया है, जिससे छात्र परेशान हैं। काउंसिलिंग 26 जून से शुरू होनी थी, लेकिन नहीं हो पाई। अब इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन भी खामोश है।
प्रदेश में एमबीबीएस की सरकारी और ऑल इंडिया मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर दाखिले के लिए 26 जून से काउंसिलिंग शुरू होनी थी। दिनभर छात्र इंतजार करते रहे। विवि में संपर्क करते रहे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। काउंसिलिंग शुरू नहीं हो पाई। जानकारी के मुताबिक, काउंसिलिंग में कुछ दिक्कतें आ रही हैं। सरकार ने हाल ही में सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की 25-25 सीटें तो बढ़ाई हैं लेकिन, यह दस प्रतिशत आरक्षण के नियमों में फिट नहीं हो पा रही हैं। श्रीनगर और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में 100-100 सीटें हैं। यहां दस प्रतिशत ईडब्ल्यूएस (इकोनोमिकली वीकर सेक्शन) अथवा आर्थिक पिछड़ों को आरक्षण के हिसाब से 10-10 सीटें बढ़नी चाहिए थीं। इसी तरह दून मेडिकल कॉलेज में 150 सीटें हैं, जिनमें 10 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से 15 सीटें बढ़नी चाहिए थीं। इन सभी कॉलेजों में 25-25 सीटें बढ़ा दी हैं, जिसकी वजह से असमंजस है कि आरक्षण में सीटें किस तरह से भरी जाएं।
निजी कॉलेज भी एक्ट पर अड़े
प्रदेश के दो निजी मेडिकल कॉलेज भी अपने-अपने विश्वविद्यालयों के एक्ट पर अड़ गए हैं। उनका कहना है कि एक्ट के हिसाब से वह सीमित संख्या में सीटें ही राज्य कोटे में दे सकते हैं। इस मामले पर भी शासन में फैसला लंबित है।
एमबीबीएस काउंसिलिंग पर अभी कुछ निर्देश आने अभी बाकी हैं। हम जल्द काउंसिलिंग शुरू करेंगे। संभावित तौर पर शुक्रवार से इसकी शुरुआत होगी।
-प्रो. विजय जुयाल, कुलसचिव, एचएनबी मेडिकल विवि