ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
दून अस्पताल में मंगलवार से पहली बार पर्मकैथ के माध्यम से डायलिसिस शुरू की गई। पर्मकैथ विधि से डायलिसिस कराने पर बार-बार ट्रैक बनाने के लिए सर्जरी नहीं करनी होगी। यह पर्मकैथ बार बार डायलिसिस की जरूरत वाले और अटल आयुष्मान योजना के तहत आने वाले मरीजों को लगाई जाएगी।
दून अस्पताल के गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. हरीश बसेरा ने बताया कि डायलिसिस के लिए आने वाले मरीजों को पर्मकैथ बेहद महंगा पड़ता था। आमतौर पर मरीज इसको वहन नहीं कर सकते हैं। यह एक तरीके की ट्यूब होती होती है जो सर्जरी के माध्यम से शरीर में फिट कर दी जाती है। इसके बाद इसी के माध्यम से डायलिसिस के दौरान खून चढ़ाया जाता है। इसकी कीमत लगभग आठ हजार रुपये या उससे भी अधिक हो सकती है। आर्थिक रूप से कमजोर लोग इसका खर्च वहन नहीं कर सकते हैं, लिहाजा सर्जरी कर उनका ट्रैक बनाया जाता है। अटल आयुष्मान योजना के तहत आने वाले मरीजों का खर्च सरकार वहन करेगी।