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नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर एक दिवसीय सेमिनार, 30जून तक मांगे गए सुझाव

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ब्यूरो/अमर उजाला।
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देहरादून। राजकीय शिक्षक संघ की राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद इकाई की ओर से आयोजित एक दिवसीय सेमिनार में केंद्र सरकार की ओर से तैयार की जा रही राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2019 के प्रारूप पर विचार विमर्श किया। इसमें शामिल अधिकारियों, शिक्षाविदें और शिक्षकों से 30 जून तक नई शिक्षा नीति को कैसे बेहतर बनाया जाए इसके लिए सुझाव मांगे। वक्ताओं ने उम्मीद जताई कि नई ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तनकारी साबित होगी।
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रविवार को ऑफिसर्स ट्रांजिट हॉस्टल सभागार में आयोजित सेमिनार में डॉ. अंकित जोशी ने प्रस्तावित शिक्षा नीति के मसौदे पर जानकारी दी। कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में आगामी 20 वर्षों के दिशा निर्धारण में नवीन शिक्षा नीति की अहम भूमिका होगी। वैश्वीकरण और प्रौद्योगिकी के इस आधुनिक परिदृश्य में शिक्षा की महत्ता के साथ-साथ संवेदनशीलता भी बढ़ी है। साथ ही समाज और विकास की ऐसी चुनौतियां भी उठ खड़ी हुई हैं, जिनका समाधान केवल शिक्षा के माध्यम से किया जा सकता है। इससे पूर्व डॉ. नंदकिशोर हटवाल ने सेमिनार की औपचारिक शुरूआत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि नवीन शिक्षा नीति को अधिक से अधिक साझा करने के साथ ही इसकी गंभीरता को समझने की जरूरत है। सेमिनार में बीपी मैंदोली, विनय थपलियाल, मनोज शुक्ला, अजय कुमार चौरसिया, राधा मैंदोली, बीना बैंजवाल, राहुल कोटियाल, प्रदीप सती, चंदन मैठाणी आदि ने अपने विचार रखे। सेमिनार में मुख्य अतिथि श्याम लाल गांगुली, मनोरमा बर्त्वाल, डॉ. अंकित जोशी, दीपिका जोशी, कमलेश पुरोहित आदि ने प्रतिभाग किया।
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