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फोटो समाचार- कॉपरेटिव बैंक भर्ती परीक्षा से पहले दिल्ली जाने को ‘रतजगा’

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ब्यूरो/अमर उजाला।
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देहरादून। उत्तराखंड को-ऑपरेटिव बैंक की भर्ती परीक्षा देने दिल्ली, हरियाणा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा जा रहे सैकड़ों युवाओं को भारी भीड़ के चलते रात 12 बजे तक आईएसबीटी से बसें नहीं मिलीं। शाम छह बजे से देर रात तक सीटों के लिए मारामारी रही। कई युवा-युवतियां बसों के आगे लेट गईं। लेकिन बस चालकों ने किसी को बस में चढ़ने नहीं दिया। वहीं आईएसबीटी पर युवाओं की भीड़ उमड़ने की सूचना पर देर रात कई निजी संचालक अपनी-अपनी बसें लेकर पहुंचे और सभी से मनमाना किराया लेकर रवाना हुए।
प्रदेश के को-ऑपरेटिव बैंकों में भर्ती के लिए सोमवार को विभिन्न केंद्रों पर परीक्षा है। इसके लिए प्रदेश में मात्र 16 केंद्र बनाए गए हैं। जबकि शेष केंद्र दिल्ली, हरियाणा, गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा सहित अन्य शहरों में बनाए गए हैं। युवा लगातार मांग कर रहे थे कि जब परीक्षा प्रदेश की है तो इसका आयोजन भी यहीं होना चाहिए। रविवार रात आईएसबीटी पर दूसरे राज्यों में परीक्षा देने जा रहे युवाओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। लेकिन, भीड़ के आगे बसें कम पड़ गई। किसी भी राज्य के लिए रोडवेज की ओर से अतिरिक्त बसों का इंतजाम नहीं किया गया था। इस पर युवाओं ने रोष जताया। कहा कि प्रदेश सरकार ने बाहरी राज्यों में परीक्षा देने के लिए केंद्र तो बना दिए हैं लेकिन अतिरिक्त बसों का इंतजाम नहीं किया। इसके लिए आईएसबीटी पर तैनात अधिकारियों से भी मांग की, लेकिन परीक्षा देने जा रहे युवा-युवतियों की परेशानी किसी को नजर नहीं आई। इस पर परेशान युवाओं ने प्रदेश सरकार की जमकर निंदा की।
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दोगुना किराया देने को तैयार
कई युवा अपने भविष्य को लेकर इतने चिंतित थे कि वह बस का दोगुना किराया देने को भी तैयार थे। लेकिन कोई चालक जाने को तैयार नहीं हुआ। चार-चार घंटे इंतजार के बाद भी बस नहीं मिली। देर रात निजी बसों को लेकर कई संचालक आईएसबीटी पहुंचे। उन्होंने एक-एक युवा से दिल्ली जाने के लिए 1100-1100 रुपये किराया वसूला।
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मुझे नोएडा परीक्षा देने जाना है। कई घंटे से बस का इंतजार कर रहा हूं। लेकिन बस नहीं मिल रही है। अब रातभर जागकर कैसे परीक्षा दें। इसका जिम्मेदार कौन होगा?
-प्रवीन नेगी, परीक्षार्थी

मैं पौड़ी से परीक्षा देने आया हूं। यहां से दिल्ली जाने के लिए कई घंटे में एक बस मिली। उसमें इतनी भीड़ थी कि चढ़ने का मौका ही नहीं मिल पाया।
-प्रकाश रावत, परीक्षार्थी

मैं उत्तरकाशी से यहां पहुंचा हूं। अभी आगे जाने के लिए कोई बस नहीं मिल पा रही है। कई घंटे हो गए। अगर परीक्षा छूट गई तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।
-अरविंद मिश्रा, परीक्षार्थी

मैं आठ बजे से बस का इंतजार कर रहा हूं। यहां बस ही नहीं है। सरकार को पहले से व्यवस्था करनी चाहिए थी। बसों की संख्या बढ़ानी चाहिए थी।
-अमित डोबरियाल, परीक्षार्थी
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