केस-1 :: अभिषेक ने वर्ष 2016 में एक कॉलेज में एनआरआई कोटे की बीएड सीट पर एडमिशन लिया था। दिसंबर में पहले सेमेस्टर की परीक्षाएं आई तो उन्हें मना कर दिया गया। विवि के इस आदेश के खिलाफ कॉलेज हाईकोर्ट गए तो हाईकोर्ट के आदेश से विवि ने परीक्षाएं करा दीं। उनकी चौथे सेमेस्टर की परीक्षाएं अगस्त 2018 के प्रथम सप्ताह में संपन्न हुई। अब जून बीतने को है, लेकिन परिणाम घोषित नहीं किया गया है।
केस-2 :: सूरज ने भी गढ़वाल विवि के संबद्ध कॉलेज में एनआरआई कोटे की सीट पर दाखिला लिया था। अगस्त-2018 में परीक्षाएं देने के बाद से सूरज भी रिजल्ट के लिए चक्कर काट रहे हैं। फिलहाल न तो कॉलेज से कोई जवाब मिल रहा है और न ही गढ़वाल विवि से। उनका दो साल का बीएड तीन साल का हो गया है। इस वजह से आगे किसी कोर्स में एडमिशन भी नहीं ले पाए हैं।
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय की लापरवाही कहें या कॉलेजों की कमी, एनआरआई कोटे से बीएड में दाखिला लेने वाले 15 कॉलेजों के 100 से ज्यादा छात्र एक साल से रिजल्ट को भटक रहे हैं। न तो कॉलेजों से उन्हें कोई जवाब मिल पा रहा है और न ही विवि इस मामले पर कोई फैसला ले रहा है।
गढ़वाल विवि के संबद्ध 15 बीएड कॉलेजों में एनआरआई कोटे में 100 से ज्यादा छात्रों के दाखिले किए गए थे। इनकी क्लासेज भी शुरू हो गई, लेकिन दिसंबर 2016 की प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाओं में गढ़वाल विवि ने इन छात्रों के शामिल होने पर रोक लगा दी। विवि का तर्क था कि एनआरआई कोटे के दाखिलों में नियमों का पालन नहीं किया गया है। इस रोक के खिलाफ कई कॉलेजों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने परीक्षा कराने का आदेश देने के साथ ही सभी कॉलेजों को एक-एक लाख रुपये की बैंक गारंटी विवि में जमा कराने का आदेश दिया। इसके बाद दूसरे सेमेस्टर में विवि ने फिर परीक्षा कराने से मना कर दिया। कॉलेज फिर हाईकोर्ट गए तो हाईकोर्ट के आदेश पर फिर दूसरे सेमेस्टर की परीक्षाएं भी हो गईं। तीसरे और चौथे सेमेस्टर की परीक्षाएं विवि ने बिना किसी विवाद के करा दीं। चौथे सेमेस्टर की परीक्षाएं अगस्त 2018 के पहले सप्ताह में पूरी हो गईं। बहरहाल अब विवि ने इन छात्रों का रिजल्ट जारी नहीं कर रहा है। मार्च 2019 में कॉलेज हाईकोर्ट गए थे तो हाईकोर्ट ने 26 मार्च को रिजल्ट जारी करने का आदेश दिया था। बावजूद इसके आज तक रिजल्ट जारी नहीं हुआ है। ऐसे में इन छात्रों का दो वर्ष का बीएड तीन साल का हो गया है और परिणाम न आने से आगे किसी अन्य कोर्स में दाखिला भी नहीं ले पा रहे हैं।
क्या होता है एनआरआई कोटा
2009 में एक शासनादेश जारी हुआ था, जिसमें गढ़वाल विवि के संबद्ध बीएड कॉलेजों को सात-सात सीटों का एनआरआई कोटा दिया गया था। इसमें एनआरआई के उपलब्ध न होने की सूरत में दूसरे छात्रों को एडमिशन दिए जाने का प्रावधान किया गया था।
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मुझे इस मामले की कोई भी जानकारी नहीं है। एनआरआई के रिजल्ट के बारे में भी कुछ नहीं कह सकता हूं।
-आरसी भट्ट, परीक्षा नियंत्रक, गढ़वाल विवि
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अगर बार-बार हाईकोर्ट जाकर ही काम होना है तो विवि के अधिकारी किसलिए बैठे हुए हैं। छात्र हमारे पास भी आ रहे हैं। हम उन्हें क्या जवाब दें। जरूरत पड़ी तो हम हाईकोर्ट में अवमानना का केस करेंगे।
-डॉ. सुनील अग्रवाल, अध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूट