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बल्डर पैसे लेते हैं, पर फ्लैट नहीं देते

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केस 1- सहस्त्रधारा रोड के पास आरजे बिल्डवेल प्रा. लि. की ओर से प्रोजेक्ट लांच किया गया है। बिल्डर ने अलॉटी से पैसा तो ले लिया, लेकिन उसे फ्लैट नहीं दिया। शिकायत पर रेरा ने बिल्डर को जून में 20 लाख से अधिक धनराशि अलॉटी को देने के आदेश दिए।
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केस 2- ऊधमसिंह नगर स्थित सामिया बिल्डर इंटरनेशनल प्रा. लि. की ओर से भी क्रेता को समय पर फ्लैट नहीं दिया। शिकायत पर रेरा ने बिल्डर पर जुर्माना लगाया। हालांकि अभी तक बिल्डर ने रेरा में धनराशि जमा नहीं कराई है। अब रेरा ने बिल्डर पर जल्द कार्रवाई करने की बात कही है।
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ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून।
रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) का बिल्डरों पर कोई खौफ नहीं है। बिल्डर अलॉटी से फ्लैट का पैसा तो ले रहे हैं, लेकिन कब्जा नहीं दे रहे हैं। इससे नाराज अलॉटी पैसा वापस करने की मांग कर रहे हैं। रेरा बनने के दो साल में कुल 349 शिकायतें आई हैं। इनमें से 250 का निस्तारण हो चुका है। इन शिकायतों में से 200 रिफंड करवाने की ही हैं।
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रेरा बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि उनके साथ कोई छलावा नहीं होगा। लेकिन, ऐसा नहीं हो रहा है। बिल्डरों की मनमानी बदसूरत जारी है। वर्ष 2017 में रेरा बना है। तब से अब तक इसमें अलॉटी की 349 शिकायतें आई हैं। इनमें से 250 मामलों का ही निस्तारण हुआ है। जबकि अन्य मामलों में अब तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है। रेरा अधिकारियों की मानें तो 250 में से 200 शिकायतें पैसा रिफंड करवाने की हैं। करीब 100 शिकायतें कब्जा न देने और करीब 49 शिकायतें रजिस्ट्री एवं अन्य हैं। मौजूदा समय की बात करें तो प्रदेश में बिल्डरों के एक हजार से अधिक प्रोजेक्ट चल रहे हैं। जबकि रेरा में मात्र 260 प्रोजेक्ट रजिस्टर्ड हैं। राजधानी की बात करें तो यहां हजारों एजेंट जमीन-मकानों की खरीद-फरोख्त करते हैं। लेकिन, रेरा की ढिलाई की वजह से मात्र 230 एजेंट पंजीकृत हैं। ऐसे में जब तक रेरा सख्त कदम नहीं उठाता, बिल्डरों और एजेंटों में दहशत नहीं होगी।

अभी तक नहीं बनी रेरा की सील और लोगो
रेरा का अभी तक लोगो और सील भी नहीं बन पाई है। रेरा अध्यक्ष विष्णु कुमार ने बताया कि इसका डिजाइन बनाकर शासन को भेज दिया है। शासन से स्वीकृति मिलते ही उसे लागू कर दिया जाएगा।

अधिकतर बिल्डर अलॉटी से पैसा तो ले लेते हैं, लेकिन कब्जा नहीं देते। ऐसे बिल्डरों पर अब सख्ती की जाएगी। अलॉटी के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। उन्हें किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। -विष्णु कुमार, अध्यक्ष रेरा
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