ईडब्ल्यूएस के 10 प्रतिशत आरक्षण की सीटें तय होने से प्रदेश में 12वीं के बाद दाखिलों की पूरी प्रक्रिया अटक गई है। आदेश जारी न हो पाने की वजह से कॉलेज और विश्वविद्यालय नए सत्र के दाखिले शुरू ही नहीं कर पा रहे हैं। हालात यह है कि छात्र पंजीकरण करा रहे हैं, प्रवेश परीक्षा दे रहे हैं, लेकिन उन्हें कितनी सीटों पर मौका मिलेगा, इसका पता ही नहीं है। ऐसे में इस साल सत्र लेट होने का खतरा भी मंडराने लगा है।
केंद्र के बाद राज्य सरकार ने भी आर्थिक रूप से पिछड़ों (ईडब्ल्यूएस) को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का एलान किया था। इसके तहत उच्च शिक्षा निदेशालय को आरक्षण से संबंधित दिशा-निर्देश जारी करने हैं। इसी के तहत कॉलेज और विश्वविद्यालयों में सीट बढ़ोतरी पर फैसला लिया जा सकेगा। आलम यह है कि प्रदेश में अभी तक ईडब्ल्यूएस आरक्षण का कोई आदेश ही जारी नहीं हो पाया है। इस वजह से शिक्षण संस्थानों में दाखिला प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।
क्या होना है बदलाव
दरअसल, ईडब्ल्यूएस आरक्षण के तहत हर कॉलेज व विवि में 10 प्रतिशत सीटें ईडब्ल्यूएस श्रेणी के छात्रों के लिए आरक्षित की जानी हैं। इसके तहत आरक्षण तय करने के लिए सीटों में बढ़ोतरी की जानी है। उसके बाद ही बढ़ी हुई सीटों पर ईडब्ल्यूएस श्रेणी के दाखिले किए जाने हैं।
क्या होगा नुकसान
समय से दाखिले शुरू न होे पाने की वजह से पूरा सत्र लेट हो जाएगा। इस वजह से छात्रों का समय बर्बाद होगा। दूसरी ओर दाखिला प्रक्रिया लेट होने की वजह से छात्रों के पास दूसरे संस्थानों में दाखिलों का विकल्प खत्म हो जाएगा।
शिक्षण संस्थानों ने दाखिला प्रक्रिया के तहत पंजीकरण शुरू तो कर दिए हैं, लेकिन इन छात्रों के दाखिले कब किए जाएंगे, इसका कुछ पता नहीं है। क्योंकि अभी तक ईडब्ल्यूएस आरक्षण के बाबत सरकार या उच्च शिक्षा निदेशालय से कोई दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हो पाए हैं। जब तक आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नहीं होगी, तब तक दाखिले शुरू नहीं हो पाएंगे।
-प्रो. वीए बौड़ाई, अध्यक्ष, प्राचार्य परिषद
ईडब्ल्यूएस आरक्षण को लेकर दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं। तब तक शिक्षण संस्थान अपनी पंजीकरण प्रक्रिया चलाए रखें। जल्द ही इस संबंध में सभी शिक्षण संस्थानों को अवगत करा दिया जाएगा।
-डॉ. एससी पंत, निदेशक, उच्च शिक्षा