दुश्मन की गोलियों के आगे ढाल है सेना का अनुशासन
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। आईएमए पासिंग आउट परेड के मुख्य अतिथि दक्षिण पश्चिम कमान के जनरल आफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल चेरिस मैथसन ने कहा कि सेना का अनुशासन ही है जो दुश्मन की गोलियों से सैनिकों को बचाता है। विषम परिस्थितियों में भी यही अनुशासन सैनिकों के लिए हर परिस्थिति में ढाल बनकर खड़ा हो जाता है।
लेफ्टिनेंट जनरल मैथसन ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है, जिसकी सीमाओं पर तो तनाव के साथ-साथ अंदरूनी हिस्सों में भी चुनौतियों के पहाड़ हैं। इनसे निबटने के लिए सेना को ही अंत समय पर मोर्चा संभालना होता है। भारत की सेना दुनिया की कुछ चुनिंदा सेनाओं में से एक है, जो हर फ्रंट पर दुश्मन की हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। सेना के ये अनुशासित जवान ही देश की अखंडता को बचाए हुए हैं। वर्तमान समय में भारत की सेना युद्ध की नई विधाओं में भी पारंगत हुई है। अभी आगे और भी मुकाम सेना को हासिल करने हैं, जिनके लिए सेना के अफसरों को हर समय तैयार रहना होगा।
उन्होंने जेंटलमैन कैडेट्स को संबोधित करते हुए भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास को भी बताया। कहा कि ये वही सेना है जिसके सामने दुनिया का सबसे बड़ा आत्मसमर्पण हुआ। 90 हजार से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को एक साथ घुटनों के बल बैठाकर भारतीय सेना ने यह कीर्तिमान स्थापित किया। उन्होंने कैडेट्स को इसी गौरवशाली इतिहास को याद रखते हुए भारती सेना को और सशक्त बनाने का आह्वान किया। लेफ्टिनेंट जनरल चेरिस मैथसन को सेना में सात जून को 40वां वर्ष शुरू हो गया है।