बिजली की खपत ने तोड़ा डेढ़ दशक का रिकार्ड
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। भीषण गर्मी के चलते दो माह में राज्य में रिकॉर्ड तोड़ बिजली की खपत बढ़ गई है, जिस कारण यूपीसीएल को औसतन दोगुने दाम पर हर माह 300 मेगावाट बिजली खरीदनी पड़ रही है। यह स्थिति करीब डेढ़ दशक बाद बनी है। हालांकि यूपीसीएल प्रबंधन के लिए राहत देने वाली बात यह है कि यूजेवीएनएल की जलविद्युत परियोजनाओं में रिकॉर्ड बिजली उत्पादन हो रहा है, अन्यथा यूपीसीएल के साथ ही उपभोक्ताओं के सामने और गंभीर संकट खड़ा हो जाता।
यूपीसीएल के आंकड़ों के अनुसार दो माह से पड़ रही भीषण गर्मी के चलते बिजली की खपत 42 मिलियन यूनिट प्रतिदिन पर पहुंच गई है। जबकि इससे पहले यह खपत 28-30 मिलियन यूनिट प्रतिदिन रही थी। अफसरों के मुताबिक पिछले दिनों तो एक दिन में बिजली की खपत 47 लाख यूनिट तक पहुंच गई थी। इतनी अधिक बिजली की खपत को लेकर यूपीसीएल की ओर से औसतन दोगुने दाम पर 300 मेगावॉट बिजली खरीदनी पड़ रही है।
यूपीसीएल प्रबंधन को वित्तीय वर्ष 2017-18 में 106 लाख यूनिट बिजली 2.46 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदनी पड़ी। साल 2018-19 में यह आंकड़ा अचानक बढ़कर 980 लाख यूनिट पहुंच गया। प्रबंधन को औसतन दोगुने दाम यानी 4.04 रुपये की प्रति यूनिट की दर पर बिजली खरीदनी पड़ी। यूपीसीएल को टेंडर के जरिये निजी कंपनी के साथ ही बिजली की मांग को दूर करने के लिए केंद्र सरकार के एनर्जी एक्सचेंज से भी बिजली खरीदनी पड़ी।
आंकड़ों के मुताबिक साल 2017-18 में एनर्जी एक्सचेंज से 754 लाख यूनिट बिजली 3.86 रुपये की दर से खरीदनी पड़ी। जबकि साल 2018-19 में 1068 लाख यूनिट बिजली 4.25 रुपये की दर से खरीदनी पड़ी। महंगी दरों पर बिजली खरीदने से यूपीसीएल प्रबंधन को हर साल करोड़ों का भुगतान करना पड़ा। यूपीसीएल अफसरों के मुताबिक बिजली की मांग को दूर करने के लिए फिलहाल 300 मेगावाट बिजली की खरीद निजी कंपनियों से खरीदी जा रही है। यह स्थिति करीब डेढ़ दशक बाद बनी है।
हालांकि राहत देने वाली बात यह है कि यूजर पैनल की जल विद्युत परियोजनाओं में रिकार्ड उत्पादन हो रहा है वरना स्थिति और खराब हो जाती है, जिससे निपटना आसान नहीं होता।
यूपीसीएल के मुख्य अभियंता एके सिंह ने बताया कि गर्मी के चलते बिजली की खपत बढ़कर 42 लाख यूनिट तक पहुंच गई है। ऐसे में बिजली की मांग को दूर करने के लिए कई संसाधनों से बिजली खरीदनी पड़ रही है। उम्मीद है कि बारिश शुरू होने के साथ ही बिजली की मांग कम हो जाएगी।