ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून।
ललित कला अकादमी की ओर से आईटीआईटीआई में आयोजित कला शिविर में विभिन्न राज्यों के चित्रकारों ने कैनवास पर जनजातीय जीवन के रंग उकेर कर लोगों को मंत्रमुग्ध किया। कला शिविर में चित्रकारों ने महाराष्ट्र की वारली कला, बिहार की मधुबनी, मध्यप्रदेश की परंपरागत शैली और आधुनिक शैली के चित्रों को आकर्षक रूप दिया।
शुक्रवार को झाझरा में विज्ञान धाम के पास स्थित इन्फ ॉरमेशन टेक्नोलॉजी इंफ ॉरमेशन फॉर द ट्राइब्स ऑफ इंडिया (आईटीआईटीआई) में सात दिवसीय राष्ट्रीय जनजाति कला शिविर का समापन हुआ। शिविर में उत्तराखंड टैक्नीकल यूनिवर्सिटी की रजिस्ट्रार अनिता रावत और एडमिरल एचसी बिष्ट ने शिरकत की। उन्होंने चित्रों की बारीकियां जानने के साथ ही कलाकारों की कल्पना की सराहना की। वहीं, पूर्व सांसद तरुण विजय ने बताया कि आदिवासी कला समाज को जीने का संदेश देते है। उन्होंने बताया कि इन सभी कलाकृतियों को उत्तरा आर्ट गैलरी में प्रदर्शित किया जाएगा।
कला शिविर में लोकनृत्य, प्रदूषण से पर्यावरण को नुकसान, तमील के नायक-नायिका, बारिश का किसानों के जीवन पर प्रभाव आदि पर आधारित चित्र देखते ही बनते थे। चित्रों में मानवजीवन के विभिन्न पहलुओं के साथ-साथ पशु-पक्षी एवं प्रकृति का चित्रण और रंगों का संयोजन चित्रकरों की विशेषताओं को दर्शा रहे थे। कार्यक्रम में सभी चित्रकारों को प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया गया।
----
कलाकृतियों से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
राष्ट्रीय जनजाति कला शिविर में चित्रकारों ने अपनी कलाकृतियों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। पर्यावरण संरक्षण पर बनाई गई कलाकृतियों ने सभी को आकर्षित किया। चित्रकार नवल किशोर ने बताया कि उन्होंने अपनी कलाकृतियों में लोकनृत्य, हिंदू रिति-रिवाज में शादी समारोह की महत्ता, कलश, सूर्य देवता, कुलदेवी आदि का समावेश किया है। तमिलनाडु से पहुंचे दीन दयाल और दया निधि ने दूनवासियों को तमिल संस्कृत से अवगत कराने का प्रयास किया। ढोल-डमरू की महत्ता और नंदी पर विराजमान नायक-नायिका की कलाकृति को लोगों ने खूब सराहा। मध्यप्रदेश के वेंकट रमन सिंह श्याम ने प्रदूषण से पर्यावरण को हो रहे नुकसान को अपने चित्रों में दर्शाया है।