रुद्रप्रयाग। केदारनाथ में ड्यूटी छोड़कर जाने वाले उपजिलाधिकारी गौरव चटवाल ने अब जिलाधिकारी को पत्र भेजकर चिकित्सा अवकाश की अनुमति मांगी है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि ‘केदारनाथ में अधिक ठंड और स्वास्थ्य खराब होने के कारण मेरे मस्तिष्क की दशा ठीक नहीं थी, साथ ही मैं पूरी तरह से होश में नहीं था, जिस कारण गलती से आकस्मिक अवकाश की जगह त्यागपत्र लिख दिया’।
एसडीएम चटवाल ने जिलाधिकारी से चिकित्सा अवकाश की अनुमति मांगी है। उन्होंने कहा है कि सरकार के निर्देशों पर 13 मई 2019 को उनका स्थानांतरण डिप्टी कलेक्टर जिला नैनीताल के पद से डिप्टी कलेक्टर रुद्रप्रयाग के पद पर किया गया था। 16 मई को जिलाधिकारी नैनीताल द्वारा उन्हें कार्यमुक्त किया गया। 17 मई को वे केदारनाथ पहुंचे और अपने कार्यों में जुट गए थे, लेकिन केदारनाथ में अधिक ठंड होने और आए दिन मौसम खराब होने के कारण उनकी तबियत खराब होने लगी, जिस कारण उनके मस्तिष्क की स्थिति ठीक नहीं थी और वे पूरी तरह से होश में भी नहीं थे। इसके चलते बीते 31 मई को कार्यस्थल छोड़ने व आकस्मिक छुट्टी के लिए लिखे गए प्रार्थना पत्र में वे आकस्मिक अवकाश के स्थान पर त्यागपत्र शब्द लिख गए। चटवाल का कहना है कि वे अपने परिजनों के पास इलाज के लिए चले गए थे। परिजनों द्वारा उनका ऊधमसिंह नगर जनपद के काशीपुर में इलाज कराया गया। यहां उनका रक्त परीक्षण भी कराया गया। चिकित्सकों ने उन्हें एक सप्ताह तक आराम करने की सलाह दी है। इस वजह से वह अपने कार्यस्थल केदारनाथ से 31 मई से अनुपस्थित चल रहे हैं, लिहाजा इस पत्र के माध्यम से वह इसकी सूचना दे रहे हैं।
एसडीएम चटवाल ने स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का हवाला देते हुए जिलाधिकारी से एक हफ्ते का चिकित्सा अवकाश एवं कार्यस्थल से बाहर रहने की अनुमति मांगी है। इधर, जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने इस संबंध में ज्यादा कुछ कहने से भी साफ इनकार कर दिय। उन्होंने कहा कि मामला शासन के संज्ञान में है।