एमडीडीए में शामिल हुआ साडा का इलाका
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (साडा) में शामिल 121 गांव मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) में शामिल कर दिए गए हैं। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लग गई। एमडीडीए में शामिल होने से अब साडा के क्षेत्रों में भी नियोजित तरीके से विकास हो सकेगा।
साडा के पास बड़ा क्षेत्र होने और पर्याप्त टेक्नीकल और सपोर्ट स्टॉफ नहीं होने के चलते अवैध निर्माण लगातार बढ़ता जा रहा था। जबकि एमडीडीए शहरी क्षेत्र में होने के चलते अधिकांश निर्माण पर ही अपनी नजर रखता है, जिसे लेकर पिछले वर्ष साडा के अधिकारियों की ओर से दूसरी बार शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। इससे पहले वर्ष 2015 में भी प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन तब इस पर निर्णय नहीं हो पाया था, लेकिन इस बार कैबिनेट ने इस पर मुहर लगा दी। एमडीडीए के अधीन जहां शहर और उसके आसपास के क्षेत्र हैं। वहीं, साडा में सभी बाहरी इलाके आते हैं। देहरादून और टिहरी जिले के करीब 121 गांव साडा के अंतर्गत आते थे। एमडीडीए में शामिल होने के बाद अब इन क्षेत्रों में होने वाले निर्माण पर प्राधिकरण की नजर रहेगी।
बता दें कि वर्ष 2015 में उत्तराखंड आवास एवं नगरीय विकास प्राधिकरण (उडा) के गठन के बाद वैसे भी प्राधिकरण और विनियमित क्षेत्र से बाहर के इलाके खुद ही इसके अधीन आ गए हैं। ऐसे में साडा के औचित्य पर सवाल उठने लगे थे।
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साडा क्षेत्र में धड़ल्ले से हुआ अनियोजित निर्माण
एमडीडीए के क्षेत्र को छोड़ दें तो साडा के पास काफी बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्र था। स्टाफ की कमी रही, जिसके कारण लोग यहां नक्शा पास कराने भी नहीं आते हैं। साथ ही धड़ल्ले से साडा क्षेत्र में अवैध निर्माण हुआ।
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एमडीडीए रखेगा निर्माण पर नजर
साडा को एमडीडीए में शामिल होने के बाद अब इन क्षेत्रों में होने वाले निर्माण पर प्राधिकरण की नजर रहेगी। जबकि वर्तमान की बात करें तो साडा में शामिल ज्यादातर क्षेत्रों में निर्माण कार्यों की जानकारी किसी के पास नहीं होने के कारण यहां अनियोजित निर्माण हुआ है।
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एमडीडीए और साडा को मर्ज करने की कैबिनेट ने मुहर लगा दी है, इससे जनता को सहूलियत होगी। साडा का स्टाफ भी एमडीडीए में मर्ज होगा।
- सुंदर सेमवाल, सचिव, साडा