ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
इस साल से डॉक्टरी की पढ़ाई की शुरुआत प्राथमिक उपचार से होगी। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने 22 साल के बाद एमबीबीएस का सिलेबस बदला है। इस सिलेबस का प्रशिक्षण दून मेडिकल कॉलेज में पूरा हो चुका है। अब हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में शुरू होने जा रहा है।
एमबीबीएस में अभी तक छात्रों के दाखिले के बाद अस्पताल तक जाने में लंबा समय लग जाता था। सिलेबस 22 साल पुराना था। इतने लंबे अंतराल में तमाम परिवर्तन इस कोर्स से अछूते थे। लिहाजा, एमसीआई ने पाठ्यक्रम बदल दिया है। ये पाठ्यक्रम 2019 के बैच के छात्रों पर लागू होगा। इसे कॉम्पेटेटिव अंडर ग्रेजुएट बेस्ड मेडिकल एजुकेशन नाम दिया गया है। पाठ्यक्रम की खास बात है छात्रों को दाखिले के बाद बेसिक नॉलेज दी जाएगी। यह फाउंडेशन कोर्स होगा, जो एक महीने तक चलेगा। इसमें ही छात्रों को मरीजों के प्रति व्यवहार, संवेदनाओं का पाठ पढ़ाया जाएगा। देशभर में लगातार चिकित्सकों द्वारा मरीजों के प्रति दुर्व्यवहार के मामले प्रकाश में आ रहे हैं। लिहाजा, एमसीआई ने व्यवहार कुशल बनाने पर फोकस किया है।
पहले एक महीने में यह सीखेंगे छात्र
-आपातकाल में प्राथमिक उपचार देना।
-कॉर्डियक अरेस्ट की स्थिति में प्राथमिक उपचार की जानकारी।
-प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति से रूबरू होना।
-गांव में जाकर वहां के रहन-सहन और बीमारियों की जानकारी जुटाना।
-दूसरे राज्यों से यहां आकर पढ़ने वाले छात्रों को स्थानीय भाषा का ज्ञान देना।
-जिन्हें अंग्रेजी नहीं आती उन्हें सीखना, कंप्यूटर की जानकारी भी देना प्रमुख हिस्सा है।
-स्वच्छता, संगीत भी पाठ्यक्रम का हिस्सा होगा।
-स्वच्छता अभियान को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया है।
-छात्रों को रुचि के मुताबिक खेल और संगीत के चयन का भी अधिकार दिया जाएगा।
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एमसीआई की ओर से लागू होने जा रहे नए पाठ्यक्रम का दून मेडिकल कॉलेज में प्रशिक्षण पूर्ण हो चुका है। हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में शुरू होने वाला है। एमसीआई के विशेषज्ञ यहां आकर फैकल्टी को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
-प्रो. विजय जुयाल, कुलसचिव, एचएनबी मेडिकल विवि