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10वीं के टॉपर और दिव्यांग बनेंगे बाल विधायक

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10वीं के टॉपर और दिव्यांग बनेंगे बाल विधायक
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। उत्तराखंड बोर्ड, सीबीएसई व आईसीएसई की 10वीं के टॉपर छात्र-छात्राओं को बाल विधानसभा का सदस्य मनोनीत किया जाएगा। साथ ही विधानसभा में दिव्यांगों की आवाज को पुरजोर तरीके से उठाने के लिए दिव्यांगों को भी प्रतिनिधित्व मिलेगा। इसके अलावा विधानसभा सदन में 71वें बाल विधायक के तौर पर अनुसूचित जाति के बच्चों को प्रतिनिधित्व मिलेगा। उत्तराखंड बाल विधानसभा सत्र के तीसरे दिन इन सभी प्रस्तावों को बहुुमत से पारित किया गया।
बाल विधानसभा सत्र के तीसरे दिन सभी बाल मंत्रियों द्वारा अपने-अपने प्रस्ताव सदन के पटल पर रखे गए और पक्ष-विपक्ष ने उन पर चर्चा की गई। इस दौरान बालिकाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे चर्चा का केंद्र रहे। सदन में बच्चों की गुणवत्तापरक शिक्षा, विद्यालयों में जल एवं स्वच्छता की सुविधाएं, जर्जर विद्यालयों के सुधारीकरण, बच्चों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति, विद्यालय, कोचिंग सेंटर एवं प्रशिक्षण स्थलों पर अग्निशमन व सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्थाएं, सरकारी बसों में बालिकाओं के लिए निशुल्क आने जाने की सुविधा, सार्वजनिक स्थलों पर बालिकाओं के लिए शौचालय की सुविधा आदि पर प्रस्ताव पारित किए गए। सदन में सहमति बनी कि पारित किए गए मसौदों को राज्य सरकार को भेजा जाएगा।
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बाल विधानसभा सत्र के तीसरे दिन शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने संबोधित किया। शहरी विकास मंत्री ने बाल विधानसभा की सराहना करते हुए बच्चों के विकास के लिए इसे महत्वपूर्ण कदम बताया। कहा कि इस प्रयास को निरंतर जारी रखने की जरूरत है। सरकार के स्तर पर हरसंभव मदद की जाएगी। इस मौके राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने कहा कि यह नवाचारी कार्यक्रम संस्थाओं एवं सरकार के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। आयोग के पास बाल विधायकों के माध्यम से कई मामले संज्ञान में लाए गए हैं जिन पर आयोग तत्परता से कार्रवाई कर रहा है।
भुवनेश्वरी महिला आश्रम के प्रमुख संरक्षक सिरिल आर रेफियल ने कहा कि राज्य के विकास में बच्चों एवं युवाओं की एक महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। प्लान इंडिया के राज्य प्रबंधक सुरेश बलोदी ने कहा कि साल 1995 में सबसे पहले बच्चों के अधिकारों की धरातल पर जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया, जिसके लिए गांव स्तर पर बाल पंचायतों का गठन किया गया। आज वही मुहिम बाल विधानसभा के तौर पर हम सबके सामने है।
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नेता प्रतिपक्ष समेत कई बाल विधायकों ने किया सदन का बहिष्कार
बाल विधानसभा के इतिहास में पहली बार नेता प्रतिपक्ष के साथ प्रतिपक्ष के सभी बाल विधायकों ने सत्ता पक्ष के बाल विधायकों से उनके प्रश्नों का उचित उत्तर न मिलने पर सदन का बहिष्कार किया गया। बाल विधायकों ने सदन के बाहर धरना भी दिया। आखिरकार बाल मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष को आश्वस्त किया कि उनकी सभी बातें बाल विधानसभा के प्रस्ताव में शामिल की जाएंगी, जिसके बाद ही धरना समाप्त किया गया।
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इस दौरान बाल विधायकों के साथ-साथ प्रमोद बिजल्वाण, अरविंद पुरोहित, अंकित काला, दीपक उप्पल, भरत रावत, चंद्रमणी उनियाल, पुष्पा बड़ोनी, श्रद्धा बिजल्वाण, शाकंबरी नौटियाल, रामपाल, पवन राणा, मीना चौहान, रामस्वरूप पालीवाल, मदन पालीवाल, मदन कठैत, हेमा, सुमन, निर्मला, परमानंद डबराल एवं राजवीर रावत, सुशील, एकता, कंचन एवं पूर्व बाल मुख्यमंत्री संदीप पंत सहित लगभग 150 प्रतिभागी मौजूद रहे।
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