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वेंटिलेटर पर राजकीय एलोपैथिक अस्पताल कोटी सहसपुर

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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
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तहसील अंतर्गत कंडी क्षेत्र के बीस गांवों के ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने वाले एकमात्र राजकीय एलोपैथिक अस्पताल कोटी सहसपुर की स्वास्थ्य सेवाएं खुद ही वेंटिलेटर पर हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विकासनगर के नियंत्रण में आने वाले इस अस्पताल में दो चिकित्सकों सहित पांच पैरा मेडिकल कर्मियों की तैनाती के बावजूद सिर्फ एक फार्मासिस्ट ही नियमित तौर पर मौजूद रहता है।
एलोपैथिक चिकित्सक पिछले दो वर्षों से नदारद हैं, जबकि महिला आयुष चिकित्सक कभी कभार ही अस्पताल में आतीं हैं। अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग को लेकर ग्रामीण कई बार आंदोलन कर चुके हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। सोमवार को भी ग्रामीणों ने अस्पताल परिसर में प्रदर्शन कर व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की।
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मसूरी की पहाड़ियों की तहलहटी में बसे कंडी क्षेत्र के कोटी, ढलानी, कोठड़ा, बिरसनी, रेतीवाला, दुधई, मिसरास पट्टी, बटोली, किनसाल गांव, देवीधार, कंडवाल गांव, द्वाथरा, धारड़ा, मलेथा, तुरोली, डिबली, ढूंढकी, आमबाग, देवीधार और जगतपुर के 10 हजार के करीब आबादी को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के वर्ष 1978 में राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय कोटी की स्थापना की गई थी। अस्पताल के लिए ग्रामीणों ने अपनी कृषि भूमि दान में दी थी। यहां अस्पताल के निर्माण के साथ ही चिकित्सकों और अन्य पैरा मेडिकल कर्मियों के लिए आवासीय भवन भी बनाए गए। ग्रामीणों ने बताया कि शुरुआती कुछ वर्षों तक ही यहां पर्याप्त कर्मचारी तैनात रहे। पिछले 10 वर्ष से अधिक समय से अस्पताल की व्यवस्थाएं बदहाल हो चुकीं हैं।
आलम यह है कि अस्पताल में ग्लूकोज की बोतल और उल्टी दस्त की दवाइयां भी नहीं हैं। साथ ही यहां घायल को टांका लगाने की सुविधा भी नहीं मिलती है। जबकि, अस्पताल में इंडोर वार्ड के लिए चार बैड उपलब्ध हैं, लेकिन दो बजे बाद अस्पताल पर ताला लग जाता है। अधिकांश अस्पताल में सिर्फ एक फार्मासिस्ट ही मौजूद रहता है। जबकि, कई दिन सिर्फ सफाईकर्मी ही अस्पताल का संचालन करता है। ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की है। प्रदर्शन करने वालों में डॉ. तुमन सिंह, रमेश आजाद, गुलाब सिंह, भगत सिंह, चंद्रकांता, सुनीता देवी, कबूल चंद, विजय सिंह, उम्मेद सिंह आदि शामिल रहे।
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अस्पताल के स्वीकृत पद
चिकित्सक : दो
फार्मासिस्ट : दो
स्टाफ नर्स : एक
वार्ड ब्वाय : एक
सफाई कर्मी : एक
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आवासीय परिसर हो चुके हैं जर्जर
अस्पताल के कर्मचारियों के लिए बने आवासीय परिसर जर्जर हो चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले 10 वर्षों से कर्मचारी यहां नहीं रह रहे हैं, जिसके चलते आवासीय भवनों की देखभाल भी नहीं हो पा रही है। देखभाल और रखरखाव के अभाव में लाखों की लागत से बने भवन जर्जर हो चुके हैं।
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मरीजों के लिए स्ट्रेचर भी नहीं
अस्पताल में चार बैड का इंडोर वार्ड होने के बावजूद मरीजों को लाने ले जाने के लिए स्ट्रेचर नहीं है। अस्पताल निर्माण के शुरुआती वर्षों में विभाग की ओर से मुहैया कराया गया स्ट्रेचर टूट चुका है, जिसे एक क्षतिग्रस्त कमरे में रखा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कृषि प्रधान क्षेत्र होने के कारण कई बार खेतों में काम करते हुए ग्रामीण चोटिल हो जाते हैं, ऐसे में स्ट्रेचर नहीं होने से मरीज को लाने ले जाने में दिक्कतें आती हैं।
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आपातकालीन वाहन का भी अभाव
अस्पताल की व्यवस्थाएं बदहाल होने से यहां मरीजों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में मरीजों को अन्य अस्पतालों तक ले जाने के लिए आपातकालीन वाहन भी मौजूद नहीं है। दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण यहां यातायात सुविधा हर समय मुहैया नहीं रहती। ग्रामीणों ने बताया कि कोटी से विकासनगर के लिए कोई भी वाहन सुविधा नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों के अकस्मात बीमार पड़ने पर 50 किमी दूर विकासनगर से आपातकालीन वाहन मंगाना पड़ता है।
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राजकीय एलोपैथिक अस्पताल कोटी में तैनात एक चिकित्सक विभाग की ओर से पीजी कोर्स करने गए हुए हैं। आयुष चिकित्सक को नियमित तौर पर अस्पताल में रहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अन्यत्र संबद्ध पैरा मेडिकल कर्मियों को मूल तैनाती स्थल पर नियुक्त करने के लिए उचित माध्यम से निर्देशित किया जाएगा। अस्पताल को सभी जरूरी संसाधन भी शीघ्र मुहैया करा दिए जाएंगे। -डॉ. केके शर्मा, प्रभारी चिकित्साधिकारी, सीएचसी विकासनगर
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