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छह साल से फरार रविकांत किरयाना मेरठ से गिरफ्तार

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ब्यूरो/अमर उजाला।
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देहरादून। डालनवाला पुलिस ने बलबीर रोड के बहुचर्चित जमीन फर्जीवाड़े में छह साल से फरार रविकांत किरयाना को मेरठ से गिरफ्तार कर लिया है। इसके खिलाफ कोर्ट से स्थायी वारंट चल रहा था। अदालत की नाराजगी के बाद किरयाना की गिरफ्तारी को एसपी सिटी श्वेता चौबे की अगुवाई में टीम गठित की गई थी। पुलिस सोमवार को उसे कोर्ट में पेश करेगी। आरोपी शहर के अधिवक्ता राजेश सूरी की हत्या में भी नामजद है।
रविवार को पुलिस अधीक्षक नगर श्वेता चौबे ने बताया कि डालनवाला कोतवाली में रविकांत किरयाना के खिलाफ वर्ष 1990 में बलबीर रोड स्थित एक जमीन को खुर्दबुर्द करने के साथ मारपीट के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। यह मामला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट ने आरोपी के तारीखाें पर पेश न होने पर 11 दिसंबर 2014 को उसके खिलाफ स्थायी गैर जमानती वारंट जारी किया था। पुलिस तब से रविकांत को वारंट तामिल नहीं करा पा रही थी। कोर्ट की नाराजगी पर एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने रविकांत की गिरफ्तारी को मार्च में टीम गठित की। तब से पुलिस इसकी तलाश में लगातार मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, नैनीताल आदि इलाकों में दबिश दे रही थी।
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एसपी सिटी ने बताया कि आरोपी रविकांत निवासी लक्ष्मी रोड डालनवाला को रविवार को मेरठ के तेजगढ़ी इलाके से गिरफ्तार किया है। सोमवार को उसे कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा। आरोपी का कोई स्थायी ठिकाना नहीं था। वह गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार नाम के साथ ठिकाने भी बदल रहा था। इसके अलावा आरोपी लगातार सिम बदल कर व्हाट्सएप पर बात करता था। बता दें कि पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने भी दो दिन पहले रविकांत की गिरफ्तारी के लिए हुए प्रयासाें की जानकारी ली थी।

आरोपी के खिलाफ 18 मुकदमे दर्ज
गिरफ्तार रविकांत किरयाना का लंबा आपराधिक इतिहास है। उसके खिलाफ धोखाधड़ी, मारपीट और दस्तावेजाें में हेराफेरी आदि के 18 मुकदमे दर्ज हैं। डालनवाला थाने से उसके खिलाफ गुंडा और गैंगस्टर एक्ट में भी कार्रवाई हुई। वर्ष 2016 में एसटीएफ ने आरोपी को पूछताछ के लिए बुलाया था। लेकिन, उस समय वारंट की बात सामने नहीं आई थी।

राजेश सूरी हत्याकांड में है नामजद
गिरफ्तार रविकांत किरयाना, अधिवक्ता राजेश सूरी हत्याकांड में भी नामजद बताया गया है। कई बड़े घोटालों को उजागर करने में अग्रणीय रहे अधिवक्ता सूरी की 29 नवंबर 2014 को हाईकोर्ट से लौटते वक्त ट्रेन में तबीयत खराब हो गई थी। अगले दिन शहर के निजी अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हृदयघात बताकर विसरा संरक्षित किया था। पांच दिसंबर 2014 को बहन रीता सूरी की शिकायत पर राजेश की हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। हत्या में रविकांत आदि नामजद कराए गए। 28 अगस्त 2015 को विसरा की रिपोर्ट आई। जिसमें राजेश की मौत जहर के कारण होना बताया था। डीजीपी ने तत्कालीन एसपी सिटी अजय सिंह के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी ने जांच के बाद फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। इसी फ रिपोर्ट को रीता सूरी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर सीजेएम कोर्ट ने एसआईटी की रिपोर्ट को खारिज कर डीआईजी गढ़वाल को जांच के आदेश दिए थे। आईजी के निर्देश पर एसपी सिटी श्वेता चौबे के नेतृत्व में गठित टीम सूरी की हत्या की जांच कर रही है।
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17 साल से बंद लिफाफे में आखिर क्या है राज
अधिवक्ता राजेश सूरी ने मौत से 12 साल पहले वर्ष 2002 में जज क्वार्टर घोटाले की जांच के दौरान एडीएम वित्त को एक बंद लिफ ाफा दिया था। उस समय अधिवक्ता ने कहा था कि यदि भविष्य में उनकी मौत होती है तो इस लिफ ाफे को खोलकर देखा जाए। नवंबर-2014 में राजेश की मौत हो गई और पांच दिसंबर को कोतवाली में हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। बावजूद इसके पुलिस की जांच इस लिफ ाफे तक नहीं पहुंची। राजेश की बहन रीता सूरी कहती है कि भाई राजेश ने लिफाफे का जिक्र उनसे भी किया था। उसमें कई ऐसे लोगों के नाम हैं जो उनकी हत्या करा सकते हैं। अधिवक्ता राजेश सूरी का बंद लिफ ाफे का राज 18 साल बाद भी नहीं खुल पाया है। आखिर क्या है इस लिफाफे में जो उन्होंने अपनी मौत से 12 साल पहले लिखकर प्रशासन को दिया था। हर कोई बंद लिफाफे के राज को जानना चाहता है।
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