ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के चलते राज्य के 30 बस अड्डों को पीपीपी मोड पर देने का मामला फिलहाल लटका हुआ है। ब्रिडकुल ने टेंडर जारी करने की प्रक्रिया तो पूरी कर ली गई है, लेकिन आचार संहिता के चलते कंपनियों का चयन नहीं हो पाया है।
उल्लेखनीय है कि देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, ऋषिकेश, हल्द्वानी, काठगोदाम, श्रीनगर, नैनीताल समेत राज्य के 30 बस अड्डों को पीपीपी मोड के तहत निजी कंपनियों को सौंपा जाना है। कंपनियां इन बस अड्डों का विकास कर इनकी जमीनों का व्यावसायिक उपयोग कर सकेेंगी। इन बस अड्डों पर कंपनियां शॉपिंग कांप्लेक्स के साथ-साथ निजी अस्पताल, होटल या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर सकेंगी। परिवहन निगम की ओर से सहमति मिलने के साथ ही इसकी जिम्मेदारी ब्रिडकुल को सौंपी गई है। ब्रिडकुल ने इन्हें पीपीपी मोड पर देने के लिए टेेंडर भी जारी कर दिया है। इसके लिए कई नामी कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई है। लेकिन, आचार संहिता के चलते मामला लटका हुआ है। ब्रिडकुल के एक अधिकारी ने बताया कि आचार संहिता खत्म होने पर ठेका आवंटित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि बस अड्डाें को पीपीपी मोड में देने से जहां परिवहन निगम और राज्य सरकार को आय होगी, वहीं यात्रियों को भी बस अड्डे पर बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।