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किसानों की माली हालत सुधारेगी सरकार

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किसानों की माली हालत सुधारेगी सरकार
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। देश के करोड़ोें किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने व विकास में उनके अहम योगदान को देखते हुए केंद्र सरकार ने हाल ही में ‘बायोटिक किसान कार्यक्रम’ की शुरुआत की है। किसानों को अत्याधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए शुरू किए गए कार्यक्रम के तहत फिलहाल 15 केंद्रोें के जरिये इसे लागू किया गया है, जबकि आने वाले पांच साल के भीतर 150 केंद्र खोले जाएंगे। केंद्र सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव डॉ. रेनू स्वरूप ने पत्रकार वार्ता में इसकी जानकारी दी।
सचिव डॉ. रेनू स्वरूप ने बताया कि सरकार की मंशा देश में ‘लीडर्स फार्मर्स’ तैयार करने की है जो अत्याधुनिक तकनीक से रूबरू होने के साथ ही बाकी किसानाें को भी जागरूक करेंगे। किसानों को तकनीक से जोड़ने के लिए पूरे देश में हब मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ ही सामुदायिक खेती को भी बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है। किसानों को एक हब से दूसरे हब में प्रशिक्षण दिया जाएगा। देश में जैव संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर कहा कि देश में जैव संसाधनों की भरमार है। जरूरत उसके अधिकतम इस्तेमाल करने की की है। देश में ‘बायो इकोनॉमी’ के क्षेत्र में कई कदम उठाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी संभावनाएं बहुत अधिक हैं। ऐसे में विभाग का प्रयास है कि ग्रामीणों पर ज्यादा फोकस किया जाए। स्किल डेवलपमेंट को लेकर कार्यक्रम बनाए जा रहे हैं। जिसके लिए ‘स्किल विज्ञान प्रोग्राम’ शुरू किया जा रहा है। उद्यमिता विकास कार्यक्रमों पर फोकस किया जा रहा है। जिसमें हैस्को जैसी संस्थाओं की मदद ली जाएगी। सचिव डॉ. रेनू स्वरूप ने कहा कि देश के हिमालयी राज्यों में बायो रिसोर्स की प्रचुरता है जिसके लिए बिजनेस मॉडल विकसित किया जा रहा है।
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‘फार्मर जोन एप’ के जरिये किसानों को मिलेगी खेती से जुड़ी अहम जानकारियां
सचिव डॉ. रेनू स्वरूप ने बताया कि अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस जैसे देशाें की तर्ज किसानों को खेती से जुड़ी तमाम अहम जानकारियां मोबाइल एप के जरिये मिले। इसके लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से ‘फार्मर जोन एप’ तैयार किया जा रहा है। फिलहाल एप के जरिये आलू की खेती से जुड़ी तमाम जानकारियां मिलेंगी, जबकि आने वाले समय में तमाम फसलों के बारे में बारे में जानकारियां दी जाएंगी। किसानों की स्थिति को मजबूत किया जा सके, इसके लिए बायो रिसोर्स बेस्ड रूरल इंपावरमेंट नेटवर्क विकसित किया जाएगा।
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डीएनए क्लब से जुड़ेंगे देश के लाखों बच्चे
बच्चोें खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों में विज्ञान प्रौद्योगिकी को लेकर रुचि बढ़े, इसके लिए डीएनए क्लब का गठन किया जा रहा है। फिलहाल डीएनए क्लब देशभर के 117 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा रहा है। इस संबंध में राज्य सरकारों से भी प्रस्ताव मांगें जा रहे हैं।
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