ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में 30 नर्सों की भर्ती तीन साल से लटकी हुई है। जब भी भर्ती की प्रक्रिया शुरू होती है तो कोई न कोई विवाद हो जाता है। परेशान अभ्यर्थियों ने अब अनशन की चेतावनी दी है।
आयुर्वेद विवि ने वर्ष 2016 में नर्सिंग भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। वर्ष 2017 में इसकी भर्ती प्रक्रिया शुरू भी हो गई थी। इस बीच कुलसचिव को लेकर विवाद हो गया था। मृत्युंजय मिश्रा के कार्यकाल में भर्ती प्रक्रिया कुछ आगे चली, लेकिन विवाद के चलते अटक गई। इसके बाद प्रभारी कुलसचिव डॉ. राजेश कुमार के कार्यकाल में भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन बात नहीं बनी। उनका कहना था कि भर्ती के लिए जिन प्रोफेसर को जिम्मेदारी दी गई थी, वह अपने राज्य वापस चली गईं। इसके बाद से प्रक्रिया लटकी हुई है। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि काउंसिलिंग के बाद भी अगर जल्द भर्ती न की गई तो वे आमरण अनशन शुरू कर देंगे। इससे भी आगे वह आत्मघाती कदम भी उठा सकते हैं।
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मृणाल धूलिया ने लिया हाईकोर्ट से स्टे
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
आयुर्वेद विवि में नर्सिंग भर्ती प्रकरण में 86 लाख रुपये डकारने के आरोपी मृणाल धूलिया उच्च न्यायालय से गिरफ्तारी पर स्टे लेने में कामयाब हो गया है। बावजूद इसके वह पुलिस के सामने नहीं आ रहा है।
पूर्व कुलसचिव मृत्यंजुय मिश्रा के करीबी माने जाने वाले मृणाल धूलिया पर आरोप है कि उन्होंने विवि में नर्सिंग के 30 पदों पर भर्ती कराने के नाम पर युवाओं से 86 लाख रुपये हड़पे हैं। बेरोजगार आयुर्वेदिक डिप्लोमा फार्मासिस्ट संघ के अध्यक्ष आजाद डिमरी ने 11 जनवरी को उनके खिलाफ नेहरू कॉलोनी थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने धूलिया की तलाश में कई जगह दबिश दी, लेकिन वह नहीं मिला। अब मृणाल धूलिया ने हाईकोर्ट से गिरफ्तारी का स्टे ले लिया है। नेहरू कॉलोनी थानाध्यक्ष दिलबर सिंह नेगी ने बताया कि स्टे की शर्तों के हिसाब से मृणाल धूलिया पुलिस के समक्ष पेश नहीं हुए हैं। लिहाजा उन्होंने हाईकोर्ट में इसकी सूचना फैक्स से भेज दी है।