ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
कीमत में उछाल के बावजूद अक्षय तृतीया पर पछवादून क्षेत्र के लोगों ने जमकर सोने की खरीदारी की। क्षेत्र के ज्वैलर्स की दुकानों में दिनभर भीड़ लगी रही। अधिकांश लोगों ने आभूषण खरीदे। हालांकि शादी का सीजन होने के कारण भी लोग दुकानों में उमड़े।
मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन सोने के आभूषण खरीदना शुभ होता है। इस दिन जो भी वस्तु खरीदी जाती है, उसका कभी क्षय नहीं होता। इसी मान्यता के तहत लोग सुख समृद्धि के प्रतीक सोने की खरीदारी करते हैं। आभूषण खरीदने पहुंचीं नूतन, मोहिता, सुषमा, निर्मला, साक्षी ने बताया कि घर में सुख समृद्धि लाने के उद्देश्य से अक्षय तृतीया पर सोने की आभूषण खरीदे। ज्वैलर्स सरदार जगमोहन व आशीष जैन ने बताया कि इस बार अक्षय तृतीय पर आभूषण खरीदने वालों की भीड़ बीते दो वर्षों की अपेक्षा ज्यादा रही।
जैन धर्म में मनाया जाता है आहार दान दिवस
अक्षय तृतीया का जैन धर्म में विशेष महत्व है। सागर चेतना प्रवाह न्यास के प्रबंध न्यासी राजकुमार जैन ने बताया कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव को तप साधना करते हुए छह माह हो गए तब वह उपयुक्त आहार के लिए निकले। मुनियों की उचित आहार विधि का ज्ञान नहीं होने के कारण ऋषभदेव को अगले छह माह तक भी आहार प्राप्त नहीं हो सका। लोग उनको उपहार-भेंट आदि देने का प्रयास तो करते, लेकिन नवधा भक्ति पूर्वक शुद्ध व निर्दोष आहारदान उनको नहीं करा सके। तत्पश्चात भगवान ऋषभदेव विहार करते हुए हस्तिनापुर आए। वहां के युवराज श्रेयांस कुमार को स्वप्न द्वारा ज्ञान हुआ कि आठ भव पूर्व उन्होंने मुनियों को किस प्रकार विधि पूर्वक आहार दिया था। श्रेयांस कुमार ने अपने भ्राता संग ऋषभदेव का स्वागत किया। नवधाभक्ति पूर्वक इक्षुरस (गन्ने का रस) द्वारा उनको आहारदान दिया। इस दौरान देवों ने पुष्पवर्षा की। यह वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया का दिन था। सभी को मुनियों व त्यागियों को आहार कराने का सौभाग्य प्राप्त हो और वह भवांतर में अक्षय पद को प्राप्त करें। इसी भावना के साथ आज का दिन आहार दान दिवस के रूप में मनाया जाता है।