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बेटियां पढ़ेगी तभी आगे बढ़ेंगी : चौहान

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ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
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अमर उजाला अपराजिता महाअभियान के तहत बृहस्पतिवार को राजकीय इंटर कॉलेज डाकपत्थर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रधानाचार्य जेएस चौहान ने कहा कि शिक्षा से ही महिलाएं सशक्त होंगी। बेटियां पढ़ेंगी तभी आगे बढ़ेंगी।
जीआईसी डाकपत्थर में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ एवं महिला सशक्तीकरण पर आयोजित कार्यक्रम में कॉलेज के प्रिंसिपल ने कहा कि यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि समाज में कोई भी लड़की केवल आर्थिक कारणों से शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे। साधन संपन्न और सक्षम लोग जरूरतमंद बेटियों को पढ़ाने-लिखाने का जिम्मा लें तो कोई भी बेटी अशिक्षित या अल्प शिक्षित नहीं रहेगी। प्रिंसिपल ने कहा कि अच्छी बात यह है कि समय के साथ बदलाव आया है और वर्तमान दौर में बेटियां हर क्षेत्र में बढ़ चढ़ कर प्रतिभाग कर रही हैं।
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इस दौरान सेवानंद शर्मा, लक्ष्मी शर्मा, रेनुका, ऋतु, सीमा, पारुल, ललिता, अजपाल नेगी, रुचिश नेगी, मुबीना, अनिल तिवारी, नरेंद्र सिंह, मानवेंद्र, विवेकानंद खंतवाल, अजय कुमार, पीके बहुगुणा, पूजा आनंद, मनोज कुमार, इंदु राणा, सुरेंद्र कुमार, डॉ. राहुल चौहान, सुरेश प्रजापति, सपना डोभाल, कामिनी पुंडीर, पूजा, प्रमोद सिंह, अनन्या सिंह, ज्योति वर्मा, रुचिका चौहान, शालू, प्रियंका बर्त्वाल, साक्षी पंवार, अंजना नौटियाल, माला, कविता, रेखा रानी, कल्पना, मंजू डिमरी आदि मौजूद रहीं।
छात्राओं ने जागरूक किया
स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में 10वीं कक्षा की निकिता ने ओरी चिरैया नन्हीं से चिड़ियां अंगना में फिर आना रे... गीत पर नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। इंटरमीडिएट की छात्रा जाह्नवी ने कविता जब नारी न होगी जग में तुम जन्म किससे पाओगे, काजल ने मत मारो इसे कोख में...बेटी, बचाओ, बेटी पढ़ाओ कविता प्रस्तुत की। निकिता और इशिता ने साहित्यकार एवं कवि नंद किशोर हटवाल की लिखी कविता बोये जाते हैं बेटे उग आती हैं बेटियां, खाद पानी बेटों में लहराती हैं बेटियां कविता सुनाई।
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कन्या भ्रूण हत्या और घटते लिंगानुपात पर केवल सरकारी अभियानों से कुछ नहीं होगा। इसके लिए समाज को जागरूक होना होगा। लोगों को जागरूक करना होगा कि बेटियां, बेटों से कम नहीं है।
-देवेश जोशी, प्रवक्ता
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महिला सशक्तीकरण को लेकर अमर उजाला अपराजिता महाअभियान की यह पहल सराहनीय है। निश्चित रूप से इससे समाज में जागरुकता आएगी और महिलाएं सशक्त होंगी।
-शंकर दयाल वर्मा, प्रवक्ता
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कोई बालिका है यह सोचकर उसे शिक्षा से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए। बेटों की तरह उसे भी समान अवसर दिए जाने चाहिए। बेटियां पढ़ेंगी तो परिवार और समाज शिक्षित होगा व देश तरक्की करेगा।
-प्रशांत कुमार बहुगुणा, शिक्षक
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नारी जहां होती है वहां देवता निवास करते हैं। वैदिक काल से ही समाज में महिलाओं की सम्मानजनक स्थिति रही है। वर्तमान समय में स्थिति में और सुधार आया है।
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-सेवानंद शर्मा, शिक्षक
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बेटा और बेटी समान हैं बेटियों को कभी बोझ नहीं समझना चाहिए। बेटियों के प्रति पुरानी सोच में भी बदलाव लाए जाने की जरूरत है। बेटियों को प्रोत्साहन मिले तो वे बेटों से बेहतर कर सकती हैं।
-विवेकानंद
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