मटोगी गांव में 15 से 20 बच्चों को जहां हर रोज पढ़ने के लिए दो से तीन किलोमीटर की तय कर लांघा, मदर्सू और कौल गांवों के स्कूलों में जाना पड़ रहा है, वहीं इस गांव का सरकारी प्राथमिक विद्यालय शून्य छात्र संख्या के चलते बंद है। ग्रामीण विद्यालय भवन का उपयोग बतौर पंचायत भवन एवं सार्वजनिक कार्यों को निपटाने के लिए कर रहे हैं। यह हाल तब है जब शिक्षा विभाग इन दिनों विद्यालय में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाए हुए हैं।
ऐसा ही एक विद्यालय बिन्हार क्षेत्र का प्राथमिक विद्यालय मटोगी है। यहां छात्र संख्या शून्य होने के चलते पांच वर्ष पूर्व शिक्षा विभाग ने विद्यालय भवन पर ताला लटका दिया था। कुछ समय तक ग्रामीण विद्यालय भवन का ताला खुलने का इंतजार करते रहे। लेकिन विभाग यहां छात्रों को प्रवेश दिलाने में असमर्थ रहा तो ग्रामीणों ने विद्यालय भवन का उपयोग बतौर पंचायत भवन एवं सार्वजनिक कार्यों को निपटाने के लिए शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने बताया कि पांच साल पूर्व जब विद्यालय को बंद किया गया तो उस समय विद्यालय में छह नौनिहाल अध्ययनरत थे। शिक्षा विभाग ने गांव में जागरुकता अभियान चलाकर छात्र संख्या बढ़ाने के बजाय उसे बंद करना ही मुनासिब समझा।
यह है नियम
शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार विद्यालय के संचालन के लिए दस छात्रों का होना जरूरी है। दस से कम छात्र संख्या पर विद्यालय को पास के अन्य विद्यालय में मर्ज कर दिया जाता है।
ब्लॉक अधिकारियों को प्रत्येक बंद पड़े विद्यालय को खोलने के लिए सेवित बस्ती में जाकर वहां प्राथमिक स्तर की शिक्षा लेने वाले और शिक्षा से वंचित नौनिहालों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए जाएंगे। साथ ही ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद अधिकांश बंद पड़े विद्यालय सुचारु किए जाएंगे।
- एसपी खाली, अपर निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा