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यात्रा सीजन सिर पर, तैयारियां सिफर

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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
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मई के प्रथम सप्ताह से चार धाम यात्रा शुरू हो जाएगी। पछवादून से होकर भी यात्रा मार्ग गुजरता है। लेकिन यहां यात्रा की तैयारियों को लेकर प्रशासन गंभीर नहीं दिख रहा है। प्रदेश में लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद यात्रा की तैयारियों में जुटे प्रशासन के दावे यहां खोखले साबित हो रहे हैं।
मार्ग पर मूलभूत सुविधाओं के अभाव के साथ ही व्यापारियों के लिए भी प्रशासन की ओर से कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं। किसी भी होटल व्यवसायी ने अभी तक अपने होटलों में रेट लिस्ट चस्पा नहीं की है और न ही खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम यहां खाद्य पदार्थों की जांच कर रही है। प्रशासन की लापरवाही के कारण यहां से गुजरने वाले यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ सकती है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश सहित देश के कई अन्य प्रांतों से आने वाले यात्री इसी मार्ग से होकर गंगोत्री, यमुनोत्री के दर्शन को जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चार धाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु सबसे पहले गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन करते हैं। इस लिहाज से इस मार्ग पर मई के पहले सप्ताह से ही यात्रियों की आवाजाही शुरू हो जाएगी।
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उधर, एसडीएम कौस्तुभ मिश्र ने बताया कि चार यात्रा की तैयारियों को लेकर प्रशासन गंभीर है। शीघ्र ही निकाय प्रशासन और व्यापारियों के साथ बैठक कर सभी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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इन सुविधाओं का है अभाव
हरबर्टपुर और विकासनगर निकाय क्षेत्र में पेयजल और सार्वजनिक शौचालय की सुविधाओं का अभाव है।
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पार्किंग की सुविधा नहीं
यहां आने वाले यात्रियों के लिए पार्किंग की सुविधा तक नहीं है। इसके चलते छोटे बड़े यात्री वाहन राष्ट्रीय राजमार्ग पर ही खड़े होते हैं। ऐसे में पहले से ही जाम की समस्या से जूझ रहे विकासनगर और हरबर्टपुर में यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाती है। यातायात को नियंत्रित करने के लिए यहां ट्रैफिक पुलिस की तैनाती भी नहीं की गई है।
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स्थानीय पर्यटक स्थलों के प्रचार प्रसार की व्यवस्था नहीं
पछवादून और जौनसार-बावर क्षेत्र में दर्जनों धार्मिक और ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटक स्थल हैं। लेकिन यात्रा काल के दौरान यात्रा मार्ग पर स्थानीय पर्यटन स्थलों की जानकारी यात्रियों को मुहैया कराने के लिए सूचना पट्ट पर चस्पा नहीं की गई और न ही पर्यटन और संस्कृति विभाग की ओर से कोई जानकारी मुहैया कराई जा रही है। जानकारी के अभाव में यहां आने वाले यात्री आसन बैराज, डाकपत्थर बैराज, अशोक शिलालेख, बाड़वाला स्थित यज्ञ वेदी तक भी नहीं जाते हैं।
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धर्मशाला, सराय की सुविधा नहीं
श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए कोई धर्मशाला या सराय भी नहीं है। इससे आर्थिक तौर पर कमजोर तबके के श्रद्धालु यहां नहीं रुकते हैं। होटलों में कमरे का किराया महंगा होने के कारण अक्सर यहां सिर्फ आर्थिक तौर पर संपन्न श्रद्धालु ही ठहरना पसंद करते हैं।
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