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न्याय में देरी न्याय से वंचित रखने के समान : मृदुला

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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
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इक्फाई विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता का समापन सोमवार को हुआ। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत कर रहीं पटना उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश और चाणक्य लॉ यूनिवर्सिटी की कुलपति न्यायमूर्ति मृदुला मिश्रा ने कहा कि न्याय में देरी न्याय से वंचित रखना है।
उन्होंने कहा कि जब आप कानून का अध्ययन करने का निर्णय लेते हैं, तो बहुत सारे विकल्प उपलब्ध रहते हैं। कानून का छात्र शिक्षाविद्, कॉरपोरेट, न्यायापालिका, सिविल सेवाओं में जा सकता है। न्यायपालिका का मतलब सिर्फ न्यायाधीश ही नहीं, बल्कि न्यायाधीश और अधिवक्ता दोनों शामिल हैं। कहा कि मूट कोर्ट सामान्य अदालत की नकल है। न्यायाधीश के समक्ष शिष्टाचार का पालन किया जाना चाहिए। मूट कोर्ट बताता है कि एक अधिवक्ता के तौर पर आपके क्या कर्तव्य और दायित्व होते हैं।
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मूट कोर्ट प्रतियोगिता के तहत आईसीएफआई विश्वविद्यालय हैदराबाद की टीम ने प्रथम और तमिलनाडु नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की टीम ने द्वितीय स्थान हासिल किया। दोनों टीमों को प्रमाणपत्र, ट्रॉफी के साथ ही नकद राशि बतौर पुरस्कार दी गई। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पवन कुमार अग्रवाल ने कहा कि तीन दिनों तक चली प्रतियोगिता के दौरान 23 संस्थानों के 69 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग कर कानून की बारीकियां समझीं। इस दौरान बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापक मौजूद रहे।
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