ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
चकराता। जौनसार में रविवार को फुलियात के साथ बिस्सू पर्व का आगाज हुआ। क्षेत्रवासियों ने इष्टदेव की बुरांस के फूल अर्पित कर आराधना की। ग्रामीणों ने मंदिर में लोकनृत्य और देवगीत गाकर खुशियां बांटी। इसके बाद ग्रामीणों ने गांव के हर एक घर पर बुरांस के फूल लगाए। पर्व के चलते बाजारों में भी रौनक रही।
जौनसार बावर में बिस्सू पर्व के आगमन से क्षेत्रवासियों में उत्साह है। रविवार सुबह संग्रांद की फुलियात के साथ हर गांव में पर्व का जश्न शुरू हुआ। सुबह स्नान ध्यान के बाद पंचायती आंगन में एकत्रित हुए ग्रामीण ढोल बाजों के साथ जंगल में पहुंचे और बुरांस के फूल लाकर इष्ट देवता के मंदिर में अर्पित किए। ग्रामीणों ने ईष्ट देव के दर्शन कर मन्नतें मांगी।
फुलियात के बाद ग्रामीणों ने पंचायत आंगन में हारुल नृत्य कर पर्व का जश्न मनाया। बिसोई मंदिर, टगरी, लाछा, बाडो, सिंगौर, जैंदेऊ, बाणाधार, चिल्हाड, सिलाऊडा, भुंद्रोली, डिमिच आदि क्षेत्रों में भी हारुल, तांदी केे गीतों के साथ फुलियात मनाया गया। बिसोई गांव के नरेश चौहान के मुताबिक पंचायती आंगनों में ढोल दमाऊ की थाप पर जैंता, हारुल, तांदी गीत गाकर देर रात तक लोक नृत्य किए गए।
मान्यता के अनुसार बिस्सू से पहले आने वाली संग्रांद को ग्रामीण एकत्र होकर जंगलों से बुरांस के फूल लाकर देवता के चरणों मे अर्पित करते हैं। साथ ही गांव के हर घर पर भी फूल लगाते हैं। ग्रामीण गोपाल, दिनेश तोमर, मेहर सिंह चौहान, नंदलाल भारती आदि का कहना है कि बसंत ऋतु के आगाज पर नई फसलों की पैदावार होती है। इन दिनों हर तरफ फसल लहलहाती नजर आती है। फसल को काटने से पहले लोग इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं।