ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
सेलाकुई। इकफाई विश्वविद्यालय में ‘तकनीकी विकास और कानून के बदलते आयाम’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शुक्रवार से शुरू हुआ। सम्मेलन में 65 विश्व विद्यालयों के 330 शोधकर्ताओं और विद्वानों ने भाग लिया।
सम्मेलन में बतौर मुख्य वक्ता शिरकत कर रहे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एल नागेश्वर राव ने कहा कि जांच के तरीकों में तकनीकी विकास हो या रिकार्ड रखने के काम के क्षेत्र में, प्रौद्योगिकी हमारे गतिशील न्याय प्रणाली पर व्यापक प्रभाव डाल रही है। छात्रों को यह समझने में रुचि लेनी चाहिए कि प्रौद्योगिकी कैसे अदालत में उनके काम और प्रदर्शन की दक्षता में सुधार करती है। कहा कि न्यायपालिका पेपरलेस कोर्ट बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है और नागरिकों के लिए कई अदालतों में अब ई-फाइलिंग जैसी सुविधाएं शुरू की जा रही हैं।
एक तरफ, मोबाइल फोन रिकॉर्ड और अभियुक्तों के कंप्यूटर में जानकारी का उपयोग पूछताछ के लिए अदालतों में किया जाता है, तो दूसरी ओर मोबाइल फोन के दूसरे उपयोग पर गोपनीयता की सुरक्षा के लिए भी प्रमुख चिंताएं हैं। इसलिए कानून को जानना, कानून के छात्रों के लिए पर्याप्त नहीं है। ज्ञान में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग और तकनीकी विकास का ज्ञान ही समाज की मदद के लिए महत्वपूर्ण है। इस दौरान कुलपति प्रो. पवन कुमार अग्रवाल, प्रति कुलपति डॉ. मुड्डू विनय, प्रो. आरके मुरली, प्रो. प्रीति सक्सेना, प्रो. राजेश बहुगुणा, डॉ. योगेश पी सिंह, डॉ. युगल किशोर, मोनिका खरोला, डॉ. सागर के जायसवाल, अभिषेक राज, रुद्रेश श्रीवास्वत, अंकित राज, सौरभ शेखर, करन उपाध्याय, मुस्कान अग्रवाल, अपूर्वा सिन्हा, जान्हवी पांडे, आयुषी श्रीवास्तव, सौरभ राजपूत आदि मौजूद रहे।