ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
गौतम ऋषि की तपस्थली गंगभेवा बावड़ी में बैसाखी पर्व से शुरू होने वाले मेले के लिए दुकानें सजनी शुरू हो गईं हैं। मिट्टी के बर्तनों के व्यापारियों ने अपनी दुकानें लगा दी हैं। साथ ही कृषि के औजारों की दुकानें भी मेला स्थल पर लग चुकी हैं।
गंगभेवा बावड़ी में लगने वाला मेला मिट्टी के बर्तनों और कृषि औजारों की बिक्री के लिए मशहूर है। बैसाखी के दिन से ही गेहूं की फसल कटनी शुरू होती है, जिसके चलते किसान बड़ी मात्रा में मेले से कृषि संबंधी औजार खरीदते हैं। सहारनपुर से आए कृषि औजारों के विक्रेता मगनू पाल, सोमेश कुमार ने बताया कि वह पिछले 10 वर्षों से मेले में दुकान लगा रहे हैं।
गंगोह से आए मिट्टी के बर्तनों के विक्रेता रमेश कुमार, शीतला देवी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग ठंडे पानी के लिए घड़ों का उपयोग करते हैं। साथ ही मिट्टी के अन्य बर्तनों का उपयोग भी होता है। पिछले पांच वर्षों से वह मेले में घड़े और मिट्टी से बने अन्य आकर्षक बर्तनों को बेच रहे हैं। सौंदर्य प्रसाधन का सामान बेचने वाले व्यापारी भी पहुंचने लग गए हैं। इसके चलते मेला स्थल पर चहल पहल बढ़ गई है। बैसाखी के दिन बावड़ी में स्नान करने के बाद पूजा-अर्चना कर लोग मेले में खरीदारी करते हैं।