पछवादून की जीवनदायिनी मानी जाने वाली कटापत्थर नहर में 15 अप्रैल से दस दिनों तक पानी नहीं बहेगा। नहर का मरम्मत कार्य शुरू होने के चलते काश्तकारों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलेगा। सबसे अधिक परेशानी गन्ना बोने की तैयारी कर रहे किसानों को होगी।
यमुना नदी से बनी कटापत्थर नहर पूरे पछवादून क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मुहैया कराती है। नहर का पानी पूरे क्षेत्र में सैकड़ों छोटी बड़ी गूलों के माध्यम से किसानों के खेतों तक पहुंचता है। कई जगहों से क्षतिग्रस्त हो चुकी नहर का लंबे समय बाद विभाग सुधारीकरण करा रहा है। इस लिए नहर को 15 अप्रैल से 24 अप्रैल तक बंद रखा जाएगा। नहर के बंद होने से गन्ना किसानों को नुकसान की आशंका है।
बता दें कि क्षेत्र में अभी भी खेतों में गन्ने की फसल खड़ी है, जिसे काटने के बाद अप्रैल माह के दूसरे पखवाड़े में नई फसल बोने के लिए खेत में पड़ी गन्ने की पत्तियों सहित खर पतवार जलाया जाएगा। काश्तकार गोपालराम, मकसूद, इंतिखाब आलम, प्रवेश सैनी ने बताया कि गन्ने की पत्तियां और खर पतवार जलाने के बाद दो या तीन दिन में खेत को पानी दिया जाना जरूरी है। पानी नहीं मिलने से गन्ने की नई फसल प्रभावित होगी। साथ ही प्याज, बींस, अदरक सहित अन्य नगदी फसलों की भी 10 दिनों तक सिंचाई नहीं हो पाएगी। इससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
जगह-जगह से क्षतिग्रस्त होने के कारण नहर का मरम्मत कार्य किया जाना जरूरी है। किसानों को नहर बंद होने से ज्यादा परेशानी न हो इसलिए अप्रैल माह के दूसरे पखवाड़े में मरम्मत कार्य शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
- शैलेंद्र कुमार बसलियाल, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड