प्राथमिक और जूनियर स्तर की गृह परीक्षाओं के लिए शिक्षा विभाग ने प्रश्नपत्र तो दे दिए, लेकिन उत्तर पुस्तिकाएं मुहैया नहीं कराईं हैं। ऐसे में शिक्षकों के सामने परीक्षाएं संपन्न कराना चुनौती बन गया है।
हालांकि, शिक्षकों ने स्वयं के संसाधनों से उत्तर पुस्तिकाओं की व्यवस्था की है। लेकिन, जिन विद्यालयों में छात्र संख्या अधिक हैं वहां शिक्षकों को उत्तर पुस्तिकाएं मुहैया कराने में परेशानी हो रही है।
शिक्षा विभाग ने 13 मार्च से शुरू हुई परीक्षाओं का पैटर्न भी बदला है। इसके चलते शिक्षकों के लिए परीक्षाएं संपन्न कराना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। उधर, अपर निदेशक प्रारंभिक शिक्षा एसपी खाली ने कहा कि प्रत्येक विद्यालय को फौरी तौर पर विद्यालय अनुदान से उत्तर पुस्तिकाओं की व्यवस्था करने को कहा गया है। जिन विद्यालयों की अनुदान राशि समाप्त हो चुकी है, उन्हें नए सत्र में मिलने वाली अनुदान राशि में परीक्षा व्यय समायोजित करने के निर्देश दिए जाएंगे।
परीक्षाओं के लिए नहीं मिल रहा बजट
जानकारी के अनुसार पिछले कई वर्षों से परीक्षाओं के संचालन के लिए विभाग की ओर से कोई बजट नहीं दिया जा रहा है। गत वर्षों तक विद्यालय स्तर पर परीक्षाएं संपन्न कराई जाती थीं, जिससे शिक्षक प्रश्नपत्र में बहु विकल्पीय प्रश्नों को शामिल करते थे। लिहाजा, अधिक उत्तर पुस्तिकाओं की जरूरत नहीं पड़ती थी। इस बार एससीईआरटी की ओर से तैयार किए गए प्रश्न पत्रों को हल करने के लिए कम से कम बारह पेज की उत्तर पुस्तिकाओं की जरूरत पड़ रही है। ऐसे में ब्लॉक के 12000 से अधिक छात्रों के लिए उत्तर पुस्तिकाएं मुहैया कराना चुनौती बना हुआ है।