ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के टीचर लर्निंग सेंटर में बृहस्पतिवार को शिक्षकों के लिए संगोष्ठी आयोजित की गई। इस दौरान फाउंडेशन की प्रशिक्षक मीनाक्षी पंत ने विज्ञान के दैनिक उपयोग पर जोर दिया।
मीनाक्षी पंत ने कहा कि विज्ञान को प्रयोगशाला की चारदीवारी से बाहर निकालकर जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है। जिससे विज्ञान आम आदमी के दैनिक जीवन को सरल बनाने के साथ ही उनके जीवन स्तर को बढ़ाने में सहयोगी बन सके। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में विज्ञान ही विकास की धुरी है। लिहाजा विज्ञान को दैनिक जीवन में ढाल कर उसका सकारात्मक उपयोग जरूरी है। उन्होंने विद्यालयों में कराए जाने वाले प्रयोगात्मक कार्यों में स्थानीय संसाधनों का अधिक उपयोग कर संसाधनों का दोहन समाज के विकास के लिए करने को कहा। संगोष्ठी में नीलम शर्मा, अशोक शर्मा, दीप्तिमाला, महेश चंद्र, संगीता चौधरी, पवन पारासर, अरविंद कुमार तिवारी, जय प्रकाश, अंजू जैन, सविता, नीलम गुलेरिया, प्रीति जैन, विभा आदि मौजूद रहीं।
क्यों मनाया जाता है विज्ञान दिवस
भारत के महान वैज्ञानिक सीवी रमन ने 28 फरवरी 1928 को रमन इफेक्ट के रूप में एक उत्कृष्ट खोज की थी। प्रकाश के विवर्तन का पता लगाने वाली इस खोज के लिए उन्हें 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला था। 1954 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। इसके बाद 1966 से हर वर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है।
क्या है रमन इफेक्ट
रमन प्रभाव ये कहता है कि जब प्रकाश की एक तरंग एक द्रव्य से निकलती है तो इस प्रकाश तरंग का कुछ भाग एक ऐसी दिशा में प्रकीर्ण हो जाता है जो कि आने वाली प्रकाश तरंग की दिशा से भिन्न है।