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परीक्षा के लिए लगानी पड़ रही 60 किमी की दौड़

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ब्यूरो/अमर उजाला, कालसी
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जौनसार बावर परगने के युवाओं को कुशल बनाकर रोजगार के लिए तैयार करने वाले राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) फजीहत का सबब बने हुए हैं। क्षेत्र के चार संस्थानों में से किसी में भी परीक्षा देने की सुविधा नहीं होने के कारण युवाओं को 60 किमी की दूरी नापकर विकासनगर की दौड़ लगानी पड़ रही है।
सरकार ने जौनसार बावर परगने के युवाओं को तकनीकी ज्ञान देकर कुशल बनाने के लिए चार आईटीआई खोले हैं, लेकिन इनमें प्रशिक्षण ले रहे युवाओं की दशा बदलने की उम्मीद बेहद कम नजर आ रही है। कहीं भवनों का अभाव है, तो कहीं अनुदेशकों की कमी। किसी भी संस्थान में प्रधानाचार्य का पद ही सृजित नहीं है। इतना ही नहीं स्थापना के चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी किसी भी संस्थान में अभी तक परीक्षा देने की सुविधा मुहैया नहीं कराई गई है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को स्वयं के संसाधनों पर विकासनगर के संस्थान में परीक्षा देने जाना पड़ रहा है। सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं को रोजगार परक तकनीकी शिक्षा के नाम पर दी जा रही आधी-अधूरी सुविधा मुसीबत साबित हो रही है।
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आईटीआई संस्थानों की स्थिति
आईटीआई ग्वासापुल (चकराता)- पंजीकृत युवाओं की संख्या 150, विकासनगर की दूरी 60 किमी
आईटीआई लाखामंडल- पंजीकृत युवाओं की संख्या 22, विकासनगर की दूरी 60 किमी
आईटीआई साहिया- पंजीकृत युवाओं की संख्या 50, विकासनगर की दूरी 32 किमी
आईटीआई कालसी- पंजीकृत युवाओं की संख्या 100, विकासनगर की दूरी 16 किमी

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बयान
केंद्रीय श्रम मंत्रालय के मानक के अनुरूप छात्र संख्या नहीं होने से जौनसार बावर परगने के संस्थानों में परीक्षा केंद्र नहीं बनाए जा रहे हैं। मानकों में परिवर्तन होने पर सबसे अधिक छात्र संख्या वाले संस्थान में परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा।
- जेएम नेगी, उपनिदेशक, राज्य औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान
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