ब्यूरो/अमर उजाला, चकराता/कालसी/साहिया
जौनसार बावर शनिवार को माघ मरोज पर्व के जश्न में डूबा रहा। पूरे क्षेत्र में धूमधाम से इस पर्व को मनाया गया। देर रात तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के चलते पंचायती आंगन लोक संस्कृति से गुलजार रहे। वहीं, सुबह पूजा अर्चना के बाद देवता को जगह-जगह बकरे चढ़ाए गए।
जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर अपनी अनूठी संस्कृति और मेहमाननवाजी के लिए प्रसिद्ध है। यहां स्थानीय स्तर पर कई त्योहार मनाए जाते हैं। इनमें से एक महीने तक मनाया जाने वाला माघ मरोज प्रमुख है। इन दिनों पर्व के कारण पूरा क्षेत्र जश्न में डूबा हुआ है। पर्व की मान्यता है कि जब तक पूरे परिवार के सदस्य घर नहीं पंहुचते तब तक घर में पाले गए बकरे को देवता को नहीं चढ़ाया जाता। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति घर न आ पाए तो उससे अनुमति लेकर बकरे चढ़ाए जाते हैं। वहीं, किसी घर में यदि कोई घटना या अनहोनी हुई है तो उस घर में गांव के लोग माघ माह के पाले गए बकरे को देवता को चढ़ाते हैं। स्थानीय लोगों को इस पर्व का वर्ष भर इंतजार रहता है। देर शाम गांव के मुखिया (स्याणा) के यहां लोग आमंत्रित होते हैं, जहां देर रात्रि तक सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं और हारुल, तांदी नृत्य का दौर चलता है। शनिवार को मरोज पर्व मनाए जाने के बाद रविवार को साजे मनाया जाएगा। वहीं, 14 जनवरी को संक्राति मनाई जाएगी।