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चमोली में कछुवा गति से हो रहा है पर्यटन विभाग की योजनाओं का निर्माण

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कर्णप्रयाग। जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए तैयार कई योजनाएं विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ी हुई है। स्थिति यह है कि पर्यटन विभाग की ओर से संबंधित विभागों को पूरा पैसा आवंटित होने के बाद भी योजनाएं पूरी नहीं हो पा रही हैं। यही नहीं कई योजनाओं के निर्माण पर भी सवाल उठ रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2017-18 में स्वीकृत 28 योजनाओं में से केवल चार ही योजनाएं पूरी हो पाई हैं।
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पिछले वित्तीय वर्ष में चमोली जिले में जोशीमठ के लिए 4, दशोली के लिए 3, कर्णप्रयाग के लिए 5, पोखरी के लिए 3, घाट के लिए 3, नारायणबगड़ के लिए 2, थराली के लिए 1 और गैरसैंण के लिए दो विकास योजनाएं स्वीकृत की गईं। यही नहीं जिला मुख्यालय पर पर्यटन विभाग के कार्यालय की मरम्मत के लिए 2 लाख और साहसिक खेलों के लिए 15 लाख स्वीकृत किए गए। कुल 112 लाख स्वीकृत किए गए जिसमें से पर्यटन विभाग अब तक कार्यदाई संस्था को 91 लाख आवंटित कर चुका है। इसके बाद भी स्वीकृत 28 योजनाओं में से केवल डिम्मर में शताब्दी द्वार का निर्माण, नारायणबगड़ में मृत्युंजय महादेव का पहुंच मार्ग, थराली में ईको पार्क और पोखरी में धर्मशाला निर्माण का ही काम हो पाया है। गैरसैंण के पुष्कर सिंह का कहना है कि नगर के कोलियाणा बैंड में पार्क निर्माण निमभन गुणवत्ता का बनाया गया है। साथ ही कई धार्मिक स्थानों पर किए गए काम भी निमभन गुणवत्ता के हैं। इधर जिला पर्यटन अधिकारी विजेंद्र पांडे का कहना है कि मामले में कार्यदायी संस्थाओं को नोटिस दिया गया है। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया का कहना है कि अधूरी योजनाओं की जांच की जाएगी।
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