ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
अमर उजाला के ‘अपराजिता-100 मिलियन स्माइल’ महाअभियान के तहत शुक्रवार को राजकीय प्राथमिक विद्यालय हरर्बटपुर में महिला सशक्तीकरण एवं बेटी बचाओ पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं को स्वरोजगार की जानकारी देते हुए बताया गया कि सामूहिक प्रयास कर वह किस तरह से आत्मनिर्भर बन सकतीं हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ पछवादून विकास मंच के संयोजक अतुल शर्मा ने किया।
कार्यक्रम में अतुल शर्मा ने कहा कि जूट के बैग, फिनायल, दालों की पैकिंग आदि तमाम ऐसे काम हैं, जिससे महिलाएं खुद का रोजगार कर सकतीं हैं। इसके अलावा मशरूम का उत्पादन किया जा सकता है। उन्होंने कुछ उदाहरण देते हुए बताया कि पछवादून में किस तरह से कई महिलाएं स्वरोजगार शुरू कर आत्मनिर्भर बनीं हैं। उन्होंने महिला शिक्षा पर भी जोर दिया। कहा कि बेटियां शिक्षित होंगी तभी उनमें सही और गलत की समझ होगी। वे यह निर्णय ले सकेंगी कि किस तरह से आगे बढ़ना है। उन्होंने स्कूल की छात्राओं को बताया कि चाहे किसी तरह की परिस्थितियां आएं वे पढ़ाई बीच में न छोड़े। कार्यक्रम का संचालन काजल गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में नंदनी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष नीता राठौर, भद्राज स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष ऊषा देवी, पूर्व सभासद मंजू शर्मा, विमलेश, ओमवती, पिंकी देवी, बीना देवी, सुषमा गोयल, अनीता, राजेश गुप्ता, अमर कुमार आदि मौजूद रहे।
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नीता ने महिलाओं को संगठित कर पेश की मिसाल
- खुद आत्मनिर्भर बनीं, अब दूसरों को दे रहीं हैं स्वरोजगार की जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
विकासनगर। फतेहपुर निवासी नीता राठौर स्वरोजगार अपनाकर न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बनीं हैं, बल्कि उन्होंने क्षेत्र की अपने जैसी अन्य महिलाओं को भी इस दिशा में आगे बढ़ाकर मिसाल पेश की है।
विकासनगर ब्लॉक की फतेहपुर निवासी नीता राठौर ने तीन साल पहले कुछ महिलाओं को संगठित कर नंदनी स्वयं सहायता समूह बनाया। समूह से जुड़ी महिलाओं ने गांव में जूट के बैग, फिनायल एवं जूट से तैयार अन्य उत्पादों को बनाने की शुरुआत की। सरकारी एवं गैर सरकारी कार्यालयों के लिए फाइल कवर भी जूट से तैयार किए गए। नीता के मुताबिक कुछ सरकारी कार्यालयों से इन जूट कवर एवं बैग की डिमांड आने लगी। इसके अलावा बाजार में भी इसकी मांग बढ़ने लगी, जिससे तीन साल पहले जो महिलाएं भारी आर्थिक तंगी से जूझ रहीं थीं, वर्तमान में आत्मनिर्भर हैं। नीता के मुताबिक सरकार यदि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के उत्पादों को बढ़ावा दे तो इससे महिलाओं को प्रोत्साहन मिलेगा।
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महिलाएं खुद का स्वरोजगार कर आत्मनिर्भर बनें, जिसकी शुरुआत बहुत छोटे स्तर से भी की जा सकती है, यदि आर्थिक तंगी है तो जितना संभव हो सके उतनी धनराशि आपस में जमा कर काम की शुरुआत की जा सकती है।
-ऊषा देवी, अध्यक्ष भद्राज स्वयं सहायता समूह
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महिलाएं अब किसी पर निर्भर नहीं हैं, बदलते दौर में उच्च शिक्षा हो या फिर खेलकूद उन्होंने बेहतर प्रदर्शन कर मुकाम हासिल किया है। आज वे अपने निर्णय खुद ले रही हैं।
- मंजू शर्मा, अध्यक्ष पछवादून विकास मंच
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बेटियां पढ़ेंगी तभी आगे बढ़ेंगी, उनमें अच्छे और बुरे की समझ होगी, वे आत्म निर्भर बनें इसके लिए बेटा, बेेटी में किसी तरह का भेदभाव न कर उन्हें खूब पढ़ाया जाना चाहिए।
- मधु जोशी, शिक्षिका, प्राथमिक विद्यालय हरर्बटपुर
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प्रतियोगी परीक्षाएं हों या फिर खेलकूद कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, जिसमें महिलाएं पीछे हों, वे पहले से अधिक जागरूक हैं। पुलिस और सेना में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी हैं।
- काजल गुप्ता, स्थानीय निवासी