ब्यूरो/अमर उजाला, रायवाला। राजाजी टाईगर रिजर्व की मोतीचूर रेंज में प्रशासन की सख्ती के बाद भी महिलाओं का जंगल के अंदर प्रवेश हो रहा है। बीते सप्ताह गुुलदार की हिंसक घटना के बाद रेंज प्रशासन की ओर से जारी अलर्ट को नजरंदाज कर महिलाएं अब भी में जंगल में प्रवेश कर रही हैं। क्योंकि पशुपालन पर निर्भर महिलाओं के सामने चारे का संकट है। शुक्रवार को भी राजाजी टाईगर रिजर्व के प्रतिबंधित वन क्षेत्र में महिलाओं का प्रवेश जारी रहा।
इस दौरान वन क्षेत्र की सीमाओं पर तैनात वनकर्मियों ने गुलदार के सक्रिय होने का हवाला देकर महिलाओं को समझाने की कोशिश की, लेकिन महिलाओं की जिद के आगे इन कर्मियों की एक न चल पाई। महिलाएं वापस लौटकर दूसरे रास्तों से जंगल में प्रवेश करने लगीं। हालात यह रहे कि कई जगहों पर महिलाओं और वनकर्मियों के बीच बहसबाजी की शिकायतें आती रहीं।
रेंज अधिकारी प्रमोद ध्यानी ने बताया कि जंगल क्षेत्र में प्रवेश करने वालों के खिलाफ हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। इसी के तहत जागरुकता अभियान भी चलाया जा रहा है। प्रवेश के रास्तों पर वनकर्मियों को तैनात किया गया है जो महिलाओं को वन क्षेत्र में जान के खतरे की जानकारी देते हुए जागरूक कर रहे हैं। इसके बावजूद अभी प्रतिबंध पर सफलता नहीं मिल पाई है।
इको विकास समितियों ने की अपील
किसी भी अप्रिय घटना से बचाने के लिए इको विकास समिति प्रतीतनगर और खांडगांव की ओर से भी ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। समिति अध्यक्ष राजेश जुगलान और चंद्र सिंह नेगी ने बताया कि ग्रामीणों को जंगल में प्रवेश न करने को लेकर जागरूक किया जा रहा है। इसके अलावा संविदा पर लगाए गए सुरक्षा कर्मियों को भी अलर्ट कर दिया गया है जो नियमित रात्रि गश्त कर रहे हैं।
पशूओं के चारे को लेकर संकट
गुलदार के जानलेवा हमले के बाद चारा पत्ती लाने वाले परिवारों में दहशत का माहौल है। पूूरी तरह पशुपालन पर निर्भर ग्रामीणों के सामने चारे का संकट खड़ा हो रहा है। गौहरीमाफी निवासी भगवती प्रसाद सेमवाल ने बताया कि गांव की 80 प्रतिशत परिवारों का मुख्य साधन पशुपालन है। बीते कई दशकों से चारे आदि की व्यवस्था स्थानीय जंगल से करते आ रहे हैं।