श्रीनगर। 12 साल की इंतजारी के बाद शुरू हुए उत्तराखंड परिवहन निगम (रोडवेज) के श्रीनगर डिपो में संसाधनों की कमी यात्रियों पर भारी पड़ रही है। डिपो के बस स्टेशन में शौचालयों में ताले लगे है। इसकी वजह इसका क्षतिग्रस्त होना है। वहीं बुकिंग काउंटर कक्ष में कबाड़ भरा है। स्टेशन का फर्श भी उखड़ चुका है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, डिपो को मेंटीनेंस के लिए प्रतिमाह मात्र पांच हजार रुपये मिलते हैं। इतनी राशि में मरम्मत हो पाना मुश्किल है।
8 नवंबर 2004 को श्रीनगर डिपो का उद्घाटन तत्कालीन परिवहन मंत्री हीरा सिंह बिष्ट ने किया था, लेकिन तीन चार दिन बाद ही यहां की बस अन्यत्र डिपो में शिफ्ट कर दी गई, जिसके चलते डिपो ठप हो गया। प्रगतिशील जनमंच के आंदोलन के बाद नवंबर 2016 में दोबारा डिपो शुरू हो गया, लेकिन व्यवस्थाओं में ज्यादा सुधार नहीं हो पाया। निगम ने पुराने भवनों में रंगरोगन कर काम चलाने की कोशिश की है। जो नाकाफी है। वर्तमान में डिपो के शौचालय में ताला लगा हुआ है। स्टेशन में जगह-जगह गड्ढे हैं। भवनों की हालात खराब है। यात्रियों के बैठने के लिए भी यहां पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं हैं। बुकिंग काउंटर में पुराना सामान भरा हुआ है। इसलिए दूसरे कमरे में ऑनलाइन टिकट बुकिंग की जाती है। दूसरी ओर श्रीनगर डिपो में निगम ने चार दुकानों का निर्माण किया हुआ है, जिनको ठेके पर दिया जाता है। उक्त दुकानें ढाई महीने से बंद है।
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---यदि संबंधित सहायक महाप्रबंधक मरम्मत की डिमांड करें, तो बजट उपलब्ध करवाया जाएगा। दो-तीन दिन के भीतर दुकानें खुल जाएंगी। -पवन मेहरा, क्षेत्रीय महाप्रबंधक उत्तराखंड परिवहन निगम