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शिक्षा के साथ संस्कारों का होना जरूरी : चिदानंद

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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। बच्चों के सर्वांगीण विकास और देश के नवनिर्माण के लिए शिक्षा के साथ संस्कारों का होना नितांत आवश्यक है। शिक्षा और संस्कार के अभाव में हमारा युवा विचारहीनता और आदर्श शून्यता के भंवर में डूब सकता है। शिक्षा के साथ संस्कारों का समावेश कर समाज में आत्मचेतना, आत्मविश्वास और जागरुकता का समावेश किया जा सकता है। यह बात स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने कही। पारस्परिक संवाद बैठक के दूसरे दिन परमार्थ गंगा तट पर केसरिया और सफेेद रंग का संगम देखने को मिला।
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केसरिया रंग में रंगे गुरुकुल के ऋषिकुमार और सफेद रंग के लिबास पहने मदरसों के बच्चे एक साथ एकता का संदेश देते दिखाई दिए। इस मौके पर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि आज हमें ऐसी शिक्षा पद्धति की जरूरत है जिससे बच्चेे आत्मनिर्भर बनें, और उनका सर्वांगीण विकास हो।
इस दौरान सभी धर्मगुरुओं ने मिलकर विविधता में एकता, शांति और भाईचारा का संदेश देते हुए रुद्राक्ष का पौधा रोपा। इस मौके पर सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, स्वामी कैलाशानंद, स्वामी हरिचेतनानंद, साध्वी भगवती सरस्वती, महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद, ध्यानणमूर्ति माताजी, स्वामी कमलदास, स्वामी रूपेश प्रकाश, श्रीकांत व्यास, इमाम उमर अहमद इलियासी, मौलाना अब्दुल्ला, मौलाना कोकब मुस्तबा, हाजी सैयद सलमान चिस्ती, मौलाना लुकमान तारापुरी, सैयद अब्बास मुर्तजा शम्सी आदि उपस्थित रहे।
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