ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
इमरजेंसी में मरीज के भर्ती होते ही एक ही छत के नीचे उसका तत्काल परीक्षण कर उपचार शुरू किया जाना चाहिए। संस्थान आपातकालीन चिकित्सा को लेकर जानजागरूकता अभियान छेड़ेगा।
यह बातें एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने बुधवार को इमरजेंसी मेडिसिन विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला में कहीं। कार्यशाला के दौरान नर्सिंग आफिसर्स, पीजी रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट चिकित्सकों को इमरजेंसी में रोगी के परीक्षण व जल्द उपचार शुरू करने में अल्ट्रासाउंड के उपयोग, इमरजेंसी की स्थिति में किसी भी प्रकार के रोगी को बेहतर उपचार देने आदि विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया। प्रो. रवि कांत ने कहा कि कार्यशाला के कांसेप्ट को संस्थान मुहिम के तहत समूचे राज्य में विस्तारीकृत करेगा। कार्यशाला के जरिए न सिर्फ एम्स के चिकित्सकों व अन्य स्टाफ को वरन राज्य के प्राथमिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सकों को भी इमरजेंसी में रोगी को जरूरत के हिसाब से तत्काल उपचार का प्रशिक्षित करेगा। इससे सुदूरवर्ती क्षेत्रों के मरीजों को आपात चिकित्सा मुहैया कराई जा सके। इसके अलावा आमजन को भी इमरजेंसी चिकित्सा जनजागरूकता अभियान से जोड़ा जाएगा, जिससे मरीज को बचाया जा सके।
इमरजेंसी में रोजाना पहुंच रहे 100 से अधिक मरीज
इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुबोध कुमार ने बताया कि एम्स में डेढ़ वर्ष पूर्व इमरजेंसी चिकित्सा सेवा शुरू की गई थी। इसमें वर्तमान में प्रतिदिन सौ से अधिक और माह में औसतन 3200 मरीज इमरजेंसी में पहुंच रहे हैं। विभाग जनवरी 2019 से पीजी एमडी स्तर पर इमरजेंसी मेडिसिन कोर्स शुरू करने की तैयारी में है। कार्यशाला में डॉ. सुब्रह्मण्यम, डॉ. भारत भूषण, डॉ. निधि, डॉ. अंकिता, डॉ. पूनम अरोड़ा आदि शामिल रहे।